कविता शायरी 

गुरु की महिमा

एक ज़िन्दगी एक ही जान, ना जाने क्यों परेशाँ इंसान। माया योनि में फंसा हुआ, भूल गया खुद को इंसान। बुन रहा है खुद ही ये जंजाल, जिसका ना कोई आर और पार। ये पाप-पुण्य का खेल जो चलता, इसी से दानव मानव बनता। संगठन, सहयोग, सफलता, इसी से मानव धर्म है चलता। हे परम पुरुष दाता दयाल, जीवों के रक्षक मेरे कृपाल। प्रगट हुए गुरु रूप धरा, रहमत से मानव को तरा। ज्ञान की ज्योति हृदय जगाई, खुद से मानव की पहचान कराई। Sonam Kharwar

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कविता शायरी 

आहत तो होते हैं हम!

बेशक तुम्हें दिखाते नही हैं पर आहत तो होते हैं हम, जब भी कभी तुम दिखाते हो आँखे, सहम जाते हैं हम, ना जाने कितनी उधेड़ बुन से गुज़र कर, देते हैं आवाज़ तुम्हें, पर तुम्हारा वो तुनक कर बात करना, घबरा जातें है हम। वैसे तो कान कम सुनते है, नज़रें भी हैं धुँधली, पर आते जाते तुम्हारे चेहरे के भाव, बख़ूबी पढ़ लेते हैं हम। माना अब वक़्त बदल गया और बदल गई ज़िंदगी, पर याद तो करो जब छोटे से बच्चे थे तुम, हाथ पकड़ तुम्हारा दुनिया…

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कविता शायरी 

हम याद तो आये होंगे

आँखों में आँसु आये होंगे, फिर भी ये लब मुस्कुराए होंगे। हम याद तो ज़रूर आये होंगे! जिक्र जो हो महफ़िल में हमारा, आप थोड़ा कतराए तो होंगें। हम याद तो ज़रूर आये होंगें! गुज़रे होंगे जब गली से हमारी, ये कदम थोड़े लड़खड़ाए तो होंगें। हम याद तो ज़रूर आये होंगे! जब सोते होगे सुकून की नींद, ख्यालों में हम गुन-गुनाये तो होंगें। हम याद तो ज़रूर आये होंगे! इस खामोशी में तुमने, कुछ अल्फ़ाज़ दबाये तो होंगे। हम याद तो ज़रूर आये होंगे! हमारे दिये हुए गुलाब, किताबों…

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कविता शायरी 

प्यार एक ख्वाहिश

खामोश जुबाँ के लफ़्ज़ों को, मेरी इन आँखों से पढ़ता। काश कोई हमसे प्यार करता! सफर ना मेरा अकेला होता, ज़िन्दगी की राहों में साथ चलता। काश कोई हमसे प्यार करता! मंजिले अलग हो फिर भी वो, हर मोड़ पर मेरा इंतेज़ार करता। काश कोई हमसे प्यार करता! लड़खड़ा जो जाऊँ मैं सफर में, थाम कर मेरा हाथ वो चलता। काश कोई हमसे प्यार करता! लोगों की दुनियादारी में, मेरे दिल की बात समझता। काश कोई हमसे प्यार करता! मतभेद हमारे में ना होता, मेरे भी ख्यालात समझता। काश कोई…

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कविता शायरी 

बारिश

उमड़ रहा है बादल, नीर की नीली गगरी भरके। घन-घोर घटा हर जगह है छाई, बूँदों वाली बारिश आई। रिम-झिम पानी बरस रहा है, अब पानी को ना कोई तरस रहे है। घर-घर में मुस्कान है छाई, बूँदों वाली बारिश आई। बच्चों की कश्ती है चल दी, सुन्दर-सुन्दर नाव बनाई। गलियों में भी रौनक छाई, बूँदों वाली बारिश आई। हल-चल करती बूँदों ने, मेरे दिल की धीमी आवाज़ सुनाई। भीनी-भीनी यादें सुलगयीं, बूँदों वाली बारिश आयी। खुशियों का आगाज़ है लाई, मौसम में बदलाव है लाई। हर ओर ही है…

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कविता शायरी 

चलो यादें बनाते हैं

उस पुराने दुश्मन से मिल आते हैं, अपने दिल की कड़वाहट मिटाते हैं। एक कप चाय पिलाते हैं, सारे गीले-शिकवे भूल जाते हैं। चलो यादें बनाते हैं। उन बेड़ियों की जकड़न से, कहीं दूर जाते हैं। घर से बाहर निकल, उन रातों में खो जाते हैं। चलो यादें बनाते हैं। किसी से दिल लगाते हैं, और आशिक़ कहलाते हैं। या इन रिलेशनशिप के चक्कर में, नही आते हैं। चलो यादें बनाते हैं। कुछ पल के लिये, इन जिम्मेदारियों को छोड़ जाते हैं। उन बचपन की गलियों में, थोड़ा घूम आते…

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कविता शायरी 

मेरे जज़्बात की कहानी

यूँही नही ये दिल भारी है, आज इश्क़ की बाज़ी हारी है। वो जान के भी अनजानी है, चलो गलती हमने ही मानी है। हर किस्सा तेरा नुरानी है, जज़्बात की मेरी कहानी है। तुम प्यार हो मेरा! दोस्त नही, ये बात देर से जानी है। रंगों की महफ़िल सजी हुई है, आज तो उसकी सगाई है। हार गया ये दिल मेरा अब, देख कर उसकी विदाई है। थाम कर मेरा हाथ वो पगली, बोल गई वो लाइन पुरानी। “मेरी याद तो तुझको आएगी न” अब ये बात भी उसको…

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कविता शायरी 

दिल टूट गया है

देख सखी! दिल टूट गया है, मेरा सजन-सखा यूँ रूठ गया है। ख़ता हुई न जाने क्या है, किस बात की मुझको मिली सजा है। कहते थे इश्क़ बेपनाह है, ख़ुदा से हमने तुमको चुना है। अब कहाँ गया वो इश्क़ पुराना, तेरा खुदा से मुझको माँग लाना। हर अदा पे मेरी मुस्कुराना, साथ में मेरे वक़्त बिताना। मेरे सपनों का एक महल बनाना, और धीरे से मुझे छोड़ है जाना। ख़ता तो है बस एक बहाना, तुझे तो मुझसे दूर था जाना। तुम बदल गए और चले गये, हम…

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कविता 

अच्छा लगता है

दो लफ्ज़ो की बात, तेरी दोस्ती का साथ! अच्छा लगता है। मेरे दिल की आवाज़, तेरा हर वो अंदाज़! अच्छा लगता है। नाक पर गुस्सा, फिर भी हर किस्सा! अच्छा लगता है। रूठ कर मुझसे, तुझे मेरा ही इन्तेज़ार! अच्छा लगता है। तेरा दोस्ती वाला प्यार, मिया-बीवी वाला व्यवहार! अच्छा लगता है। खामोश लबों के जज़्बात, इन आँखों की मुलाकात! अच्छा लगता है। इन सुलझी हुई आंखों में, तेरी उलझी सी महोब्बत! अच्छा लगता है। मेरा गुस्से से डाँटना, तेरा शौकीन होकर सुनना! अच्छा लगता है। तेरे दिल में मेरा…

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कविता शायरी 

किसान

सूखा पड़ा, बंज़र ज़मीन, उसमें है बैठा एक गरीब। है आस आंखों में भरी, जननी है जिसकी बस कृषि। चेहरे की जिसकी वो हंसी, बारिश की बूंदों में छुपी, अपने किसान की जान भी, धरती के टुकड़े में बसी। आज़ादी की लड़ी लड़ाई, हरित क्रांति भी थी आई। फिर भी प्यासा किसान भाई, ये कैसी परिवृद्धि आई। सूख गई ये धरती है या, सूख गया ये संसार। पल रहा है जिसके टुकड़ों पर, उसी को लूट रहा इंसान। हे अन्नदाता! तुम हो महान, तुम सा न कोई इस जहान। सहते…

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