कविता शायरी 

ज़िन्दगी का सामना

जब अंत है मौत, तो किस्से दरें हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। आंसुओं से लड़, खुशियों को जीते हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। अपनो से हार, तेरा दिल जीतें हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। खुद को सम्भाल, आगे बढ़े हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। लबों की मुस्कान, कहीं जाने ना दे हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। मुश्किल जो आये, बिल्कुल ना डरें हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। ज़ख्मों को अपने, चलो भूल जाएं हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना…

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कविता शायरी 

बचपन

चल लौट चलें उस दुनिया में, कुछ वर्ष पुरानी बगिया में। जब हम छोटे बच्चे थे, दिल के पूरे सच्चे थे। बस हँसना रोना आता था, कभी ना दिल ख़बराता था। संग हमारा तगड़ा था, बस दो पल का ही झगड़ा था। खेल थे इतने की फुरसत ना थी, पैसे की भी ज़रूरत ना थी। ऑफिस ना ड्यूटी जाना था, बस स्कूल से घर को आना था। संसार बड़ा ही छोटा था, माँ के पल्लू में सोता था। चाहत चाँद को पाने की थी, जल्दी से बड़े हो जाने की…

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कविता शायरी 

गरीब

इंसान को इंसान से, बहुत दूर कर जाती है। वो और कुछ नही मित्र, गरीबी कहलाती है। बरसात की बझाड़ में, भीगता शरीर है। महँगाई की मार में, काँपता गरीब है, कभी भूखे पेट ही रहता है, और बीमारियों से लड़ता है। दो रोटी को भी तरसता है, ना जाने कहाँ वो भटकता है। तन मलीन हो जाता है, पर मन पवित्र कहलाता है। यही मानकर वो गरीब, धरती पर सो जाता है। वो कैसा हुनर जानता है, मुश्किल में मुस्काता है। सूखी हड्डी का शरीर लिए, चट्टानों से भी…

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कविता शायरी 

मुझे याद रहोगे तुम

तुम्हे याद हमारी आये ना आये, हम रोज़ ही तुझको सोचेंगे। एक छोटी सी तस्वीर रखी है, तुझे रोज़ सवेरे देखेंगे। इंतेज़ार मेरा तुम्हे हो ना हो, हम बे-सबर हमेशा बैठेंगे। मीलों की दूरी हो तो भी, ख़्वाबों में तुझको बुन लेंगे। तुम्हे दो पल की फुरसत हो न हो, बातें हम अपनी सब कह देंगे। बैठ आसमाँ के नीचे हम, चाँद से बातें कर लेंगे। तुम्हे मिलने की चाहत हो ना हो, हम रोज़ ही तुमसे मिल लेंगे। यादों का पिटारा संग में होगा, जब चाहे तुझे जी लेंगे।…

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कविता शायरी 

आहत तो होते हैं हम!

बेशक तुम्हें दिखाते नही हैं पर आहत तो होते हैं हम, जब भी कभी तुम दिखाते हो आँखे, सहम जाते हैं हम, ना जाने कितनी उधेड़ बुन से गुज़र कर, देते हैं आवाज़ तुम्हें, पर तुम्हारा वो तुनक कर बात करना, घबरा जातें है हम। वैसे तो कान कम सुनते है, नज़रें भी हैं धुँधली, पर आते जाते तुम्हारे चेहरे के भाव, बख़ूबी पढ़ लेते हैं हम। माना अब वक़्त बदल गया और बदल गई ज़िंदगी, पर याद तो करो जब छोटे से बच्चे थे तुम, हाथ पकड़ तुम्हारा दुनिया…

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