कविता शायरी 

मैं, मेरी हिम्मत !

अपनो से दूर, अजनबी शहर में। कुछ है ज़रूर, इस नए सफर में।। सीखा है मैंने, खुद को ही जीना। रुकना नही, चलते है रहना।। खुद का सहारा, खुद ही है बनना। गैरों पर भरोसा, क्यों है करना।। देती वजह हूँ, हँसने की खुद को। रोती हैं आँखें, जब ज़ोर-ज़ोर से।। अँधेरों से डरकर, भागी नहीं मैं। डग-मगाए कदम पर, खड़ी रही मैं।। गिरकर ज़मीन पर, खुद को संभाला। कुछ यूं ही मैं, बन गई उजाला।। लाखों की भीड़ में ना कोई तेरा, साथी मुझे बनाना है मेरा। हिम्मत का…

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कविता शायरी 

गुरु की महिमा

एक ज़िन्दगी एक ही जान, ना जाने क्यों परेशाँ इंसान। माया योनि में फंसा हुआ, भूल गया खुद को इंसान। बुन रहा है खुद ही ये जंजाल, जिसका ना कोई आर और पार। ये पाप-पुण्य का खेल जो चलता, इसी से दानव मानव बनता। संगठन, सहयोग, सफलता, इसी से मानव धर्म है चलता। हे परम पुरुष दाता दयाल, जीवों के रक्षक मेरे कृपाल। प्रगट हुए गुरु रूप धरा, रहमत से मानव को तरा। ज्ञान की ज्योति हृदय जगाई, खुद से मानव की पहचान कराई। Sonam Kharwar

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