कविता 

अच्छा लगता है

दो लफ्ज़ो की बात,
तेरी दोस्ती का साथ!
अच्छा लगता है।

मेरे दिल की आवाज़,
तेरा हर वो अंदाज़!
अच्छा लगता है।

नाक पर गुस्सा,
फिर भी हर किस्सा!
अच्छा लगता है।

रूठ कर मुझसे,
तुझे मेरा ही इन्तेज़ार!
अच्छा लगता है।

तेरा दोस्ती वाला प्यार,
मिया-बीवी वाला व्यवहार!
अच्छा लगता है।

खामोश लबों के जज़्बात,
इन आँखों की मुलाकात!
अच्छा लगता है।

इन सुलझी हुई आंखों में,
तेरी उलझी सी महोब्बत!
अच्छा लगता है।

मेरा गुस्से से डाँटना,
तेरा शौकीन होकर सुनना!
अच्छा लगता है।

तेरे दिल में मेरा होना,
और जुबाँ पर कतराना!
अच्छा लगता है।

तारों की रात,
तेरा हसीन साथ!
अच्छा लगता है।

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4 Thoughts to “अच्छा लगता है”

  1. Umang Kaler

    ❤️❤️❤️❤️❤️

  2. PS

    और हमें आपकी कविताएं पढ़ना,
    अच्छा लगता है।

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