चलो यादें बनाते हैं
उस पुराने दुश्मन से मिल आते हैं,
अपने दिल की कड़वाहट मिटाते हैं।
एक कप चाय पिलाते हैं,
सारे गीले-शिकवे भूल जाते हैं।
चलो यादें बनाते हैं।
उन बेड़ियों की जकड़न से,
कहीं दूर जाते हैं।
घर से बाहर निकल,
उन रातों में खो जाते हैं।
चलो यादें बनाते हैं।
किसी से दिल लगाते हैं,
और आशिक़ कहलाते हैं।
या इन रिलेशनशिप के चक्कर में,
नही आते हैं।
चलो यादें बनाते हैं।
कुछ पल के लिये,
इन जिम्मेदारियों को छोड़ जाते हैं।
उन बचपन की गलियों में,
थोड़ा घूम आते हैं।
चलो यादें बनाते हैं।
यारों की फिर से,
वही महफ़िल सजाते हैं।
जोर से वही ठहाके लगाते हैं,
थोड़ा जाम खुद और सबको पिलाते हैं।
चलो यादें बनाते हैं।

