कविता शायरी 

बारिश

उमड़ रहा है बादल, नीर की नीली गगरी भरके। घन-घोर घटा हर जगह है छाई, बूँदों वाली बारिश आई। रिम-झिम पानी बरस रहा है, अब पानी को ना कोई तरस रहे है। घर-घर में मुस्कान है छाई, बूँदों वाली बारिश आई। बच्चों की कश्ती है चल दी, सुन्दर-सुन्दर नाव बनाई। गलियों में भी रौनक छाई, बूँदों वाली बारिश आई। हल-चल करती बूँदों ने, मेरे दिल की धीमी आवाज़ सुनाई। भीनी-भीनी यादें सुलगयीं, बूँदों वाली बारिश आयी। खुशियों का आगाज़ है लाई, मौसम में बदलाव है लाई। हर ओर ही है…

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कविता शायरी 

चलो यादें बनाते हैं

उस पुराने दुश्मन से मिल आते हैं, अपने दिल की कड़वाहट मिटाते हैं। एक कप चाय पिलाते हैं, सारे गीले-शिकवे भूल जाते हैं। चलो यादें बनाते हैं। उन बेड़ियों की जकड़न से, कहीं दूर जाते हैं। घर से बाहर निकल, उन रातों में खो जाते हैं। चलो यादें बनाते हैं। किसी से दिल लगाते हैं, और आशिक़ कहलाते हैं। या इन रिलेशनशिप के चक्कर में, नही आते हैं। चलो यादें बनाते हैं। कुछ पल के लिये, इन जिम्मेदारियों को छोड़ जाते हैं। उन बचपन की गलियों में, थोड़ा घूम आते…

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कविता शायरी 

मेरे जज़्बात की कहानी

यूँही नही ये दिल भारी है, आज इश्क़ की बाज़ी हारी है। वो जान के भी अनजानी है, चलो गलती हमने ही मानी है। हर किस्सा तेरा नुरानी है, जज़्बात की मेरी कहानी है। तुम प्यार हो मेरा! दोस्त नही, ये बात देर से जानी है। रंगों की महफ़िल सजी हुई है, आज तो उसकी सगाई है। हार गया ये दिल मेरा अब, देख कर उसकी विदाई है। थाम कर मेरा हाथ वो पगली, बोल गई वो लाइन पुरानी। “मेरी याद तो तुझको आएगी न” अब ये बात भी उसको…

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कविता 

अच्छा लगता है

दो लफ्ज़ो की बात, तेरी दोस्ती का साथ! अच्छा लगता है। मेरे दिल की आवाज़, तेरा हर वो अंदाज़! अच्छा लगता है। नाक पर गुस्सा, फिर भी हर किस्सा! अच्छा लगता है। रूठ कर मुझसे, तुझे मेरा ही इन्तेज़ार! अच्छा लगता है। तेरा दोस्ती वाला प्यार, मिया-बीवी वाला व्यवहार! अच्छा लगता है। खामोश लबों के जज़्बात, इन आँखों की मुलाकात! अच्छा लगता है। इन सुलझी हुई आंखों में, तेरी उलझी सी महोब्बत! अच्छा लगता है। मेरा गुस्से से डाँटना, तेरा शौकीन होकर सुनना! अच्छा लगता है। तेरे दिल में मेरा…

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कविता शायरी 

होली

ओरी होरी! भेज संदेशा, बोल पिया को जल्दी आयें। तेरा नीला-पीला रंग क्या मोहेगा, मोहे तो पिया का रंग ही भाये। पिया का रंग गहरा है इतना, छोड़-छुड़ावै ना छूटेगा। तेरा गहरा रंग भी ढल जाएगा, पिया के आगे कुछ न टिकेगा। जो रंग दे तू मेरे अंग को रंग में, धो दूंगी जल से पल में। पर पिया के रंग को कैसे धोदूँ, जो रचा हुआ है अंतर्मन में। ओरी होली! आजा रंग दे, थोड़ा अपने रंग में रंग ले। देख पिया जिससे जल जायें, भागे-भागे घर को आयें।…

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कविता शायरी 

खुद को तू पहचान ले मानव

जा रहा है तू किस दिशा में मानव, उस पथ की तू जाँच तो करले। आगे बढ़ने से पहले मानव, खुद की तू पहचान तो करले। देख रहा है जो तू मानव, अंधकार की सीढ़ी है वो। एक बार खुद में तू झाँक ले, चमत्कार तुझमें ही है वो। जान ले मानव एक सत्य तू, परम शक्ति का है तत्व तू। भटक रहा है यहाँ-वहाँ क्यों, समझ ले पहले स्वंय की गुत्थी तू। चेतन, अर्धचेतन और अचेतन, तीन तरह से बटाँ हुआ मन। अगर तुझे है जो भी पाना, इसी…

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