धैर्य और साहस से निश्चित मिलेगी सफलता
गुलजार साहब ने लिखा है, “सोचता था दर्द की दौलत से एक मैं ही मालामाल हूं देखा जो ग़ौर से तो हर कोई रईस निकला।” इन चंद लाइनों के हर एक शब्द अपने आप में बहुत बड़ी बात कह रहे हैं। मनुष्य किसी ना किसी परेशानी का शिकार अवश्य होता है। वह परेशानी घर से जुड़ी हो सकती है, ऑफिस से या हमारे स्वास्थ्य से किसी ना किसी तरह की परेशानी से ग्रसित होने के कारण उसे यही लगता है कि मुझसे ज्यादा पीड़ित संसार में कोई भी नहीं है।…
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