इंसान और प्रकृति का समन्वय और ये कविता
इंसान और प्रकृति सृष्टि की रचना ही इंसान और प्रकृति के सहयोग से मिलकर बनी है। पता यह कहा जा सकता है कि इंसान और प्रकृति एक दूसरे के सामान्य के बिना अधूरे हैं। प्रकृति हमें बहुत कुछ देती है। तो इंसान का यह दायित्व बनता है कि वह प्रकृति की दी हुई चीजों का सदुपयोग करें और उन्हें हर तरह से सुरक्षित रखने की कोशिश करें। ऐ इंसान तू क्यों लड़ रहा प्रकृति से, भूल मत तू भी इसी की देन है। वृक्ष पर वृक्ष कटवा कर बंद कर…
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