कविता शायरी 

मैं, मेरी हिम्मत !

अपनो से दूर, अजनबी शहर में। कुछ है ज़रूर, इस नए सफर में।। सीखा है मैंने, खुद को ही जीना। रुकना नही, चलते है रहना।। खुद का सहारा, खुद ही है बनना। गैरों पर भरोसा, क्यों है करना।। देती वजह हूँ, हँसने की खुद को। रोती हैं आँखें, जब ज़ोर-ज़ोर से।। अँधेरों से डरकर, भागी नहीं मैं। डग-मगाए कदम पर, खड़ी रही मैं।। गिरकर ज़मीन पर, खुद को संभाला। कुछ यूं ही मैं, बन गई उजाला।। लाखों की भीड़ में ना कोई तेरा, साथी मुझे बनाना है मेरा। हिम्मत का…

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कविता शायरी 

तुम ना होते

तुम ना होते, तो क्या होता। ज़िन्दगी का तज़ुर्बा, कुछ नया होता। मिलने को तुझसे, मन परेशान ना होता। हर वक्त लबों पे, तेरा नाम ना होता। देख कर तुझको, दिल बेईमान ना होता। यारी का तेरी, अभिमान ना होता। खुद से भी ज्यादा, तेरा ख़्याल ना होता। हर कदम पे मेरे, तेरा साथ ना होता। ख़्वाबों में तेरा, इंतेज़ार ना होता। और हमें तुमसे, प्यार ना होता। Sonam Kharwar

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कविता शायरी 

घुमक्कड़ी

घुमक्कड़ी भी कला है, घुमक्कडों से पूछो। सफर ये बड़ा है, थोड़ा तो सोचो।। मंज़िल नही है कोई, जिज्ञासा अथाह है। दिल भी ना जाने, की जाना कहाँ है।। राहें बनी है साथी, हवाओं में नशा है। डूबते हैं इसमें, तैरना किसे पता है।। खड़ी वादियाँ, बाहें फैलाए। मानों ये जैसे, मुझे बुलाए।। कदमों को जैसे, रुकना नही है। चलते है रहना, थकना नहीं है।। खो कर सफर में, पा लूँ मैं खुद को। की मौत भी मेरी, हँसीन बन जाए।। Sonam Kharwar

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कविता शायरी 

आहत तो होते हैं हम!

बेशक तुम्हें दिखाते नही हैं पर आहत तो होते हैं हम, जब भी कभी तुम दिखाते हो आँखे, सहम जाते हैं हम, ना जाने कितनी उधेड़ बुन से गुज़र कर, देते हैं आवाज़ तुम्हें, पर तुम्हारा वो तुनक कर बात करना, घबरा जातें है हम। वैसे तो कान कम सुनते है, नज़रें भी हैं धुँधली, पर आते जाते तुम्हारे चेहरे के भाव, बख़ूबी पढ़ लेते हैं हम। माना अब वक़्त बदल गया और बदल गई ज़िंदगी, पर याद तो करो जब छोटे से बच्चे थे तुम, हाथ पकड़ तुम्हारा दुनिया…

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कविता शायरी 

किसान

सूखा पड़ा, बंज़र ज़मीन, उसमें है बैठा एक गरीब। है आस आंखों में भरी, जननी है जिसकी बस कृषि। चेहरे की जिसकी वो हंसी, बारिश की बूंदों में छुपी, अपने किसान की जान भी, धरती के टुकड़े में बसी। आज़ादी की लड़ी लड़ाई, हरित क्रांति भी थी आई। फिर भी प्यासा किसान भाई, ये कैसी परिवृद्धि आई। सूख गई ये धरती है या, सूख गया ये संसार। पल रहा है जिसके टुकड़ों पर, उसी को लूट रहा इंसान। हे अन्नदाता! तुम हो महान, तुम सा न कोई इस जहान। सहते…

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कविता शायरी 

बनना है तो हवा बनो

बनना है तो हवा बनो, बस यहाँ-वहाँ तुम मस्त बहो। इस रंग बदलती दुनिया में, तुम रंगहीन मानव बनो। थाम सके ना कोई तुमको, ऐसी तुम रफ्तार धरो। काँप उठे हर जर्रा दुश्मन का, तेज़ प्रचंड तूफान बनो। पल-पल तपते क्रोधी मानव, शीतल वायु का वेग धरो। सरल-सुगम सब हो जाएगा, व्यर्थ भावना को तो तजो। त्याग के सारी दुनिया-दारी, मंद पवन की सुगन्ध बनो। भीने-भीने इस प्रवाह में मानव, खुद की तुम पहचान करो। Sonam Kharwar

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कविता शायरी 

अत्याचारी मानव

धरती भी एक दिन बोल पड़ेगी, अत्याचारी मानव की पोल खुलेगी। अनन्त काल की गाथा है ये, कब तक सारे दर्द सहेगी।   काँप उठेगा जग ये सारा, जब वो अपने दर्द कहेगी। अश्रुओं की लम्बी धार बहेगी, घायल पृथ्वी इज़हार करेगी।   जाने वो कैसा आलम होगा, जब धरती-मानव की बात छिड़ेगी, गलतियों की लंबी लिस्ट बनेगी, धरती जुर्माना चार्ज करेगी।   बोझ तले एहसानों के दबके, स्वार्थ भावना खंडित होगी। जब युद्ध में परास्त मानव होगा, तभी तो उसकी आँख खुलेगी। Sonam Kharwar

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कविता शायरी 

तेरी-मेरी दोस्ती

छोटा सा एक बच्चा था, मासूम बहुत ही लगता था। माँ का था वो राज-दुलारा, शर्मिला सा बहुत ही प्यारा। एक खेल खुदा ने ऐसा रचाया, गरिमा से कैम्प में तुझे मिलाया। हुस्न ने उसके तुझे हराया, ना जाने कैसा जादू चलाया। हर अदा पे उसकी तू मरता था, पर कहने से तू डरता था। प्यार वो तेरा पहला था, एहसास ही कुछ अलबेला था। प्यार बना तेरा खुंखार, जान की बाजी लगी कई बार। डर गई गरिमा, अब हो क्या? टब गयी बात सरगम के पास। फिर शुरू हुई…

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Featured Article कविता 

15 Beautiful Lines Mirza Ghalib That Beholds Love in a Better Way

Love is the most amazing part of our life, without love I think life is impossible. If we are talking about love then one name is always pop up in our mind, the legendary writer who creates magic with his words and verses called Mirza Asadullah Baig Khan, known to the world his pen name, Ghalib Whenever you read his verses or poetries, you just find another world, the world of imagination, the world of happiness. His words are having an in-depth pain. Mirza Ghalib was born in Agra…

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कविता शायरी 

समय

ऐ समय! तू ही बता, तुझे दोस्त मानूँ या बला। तेरे संग में चलना ही भला, तेरे रंग में रंगना है कला। गुरु मान तुझको पूजता हूँ, समय की परीक्षा जीतता हूँ। जब काम हो ना कोई भला, तब मान लूँ तुझको बला। चल चलें कुछ कर दिखायें, उन लोगों को कुछ तो सिखायें। बेठें हैं जो यूँ ही खाली, क्यों वो अपना समय गवांयें। समय की देख महत्वता को, बाजी कोई खेल जाएं। बजा दे डंका जीत का, और वक़्त से कदम मिलायें। करलें समय को मुठ्ठी में, की…

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