पापा कविता शायरी 

पापा

ज़िन्दगी के सफर में मेरे, तुमने मेरा साथ निभाया। पापा तुमने कितना कुछ सिखाया।। चलना सिखाया, काबिल बनाया। मुझको मेरा लक्ष्य बताया।। बाधाओं को मेरी, पार कराया। परेशानियों से लड़ना सिखाया।। रुकना नहीं, बस चलना सिखाया। ज्ञान का नया पाठ पढ़ाया।। गिरने से मुझको, तुमने बचाया। हर कदम पर मेरा साथ निभाया।। डर जाऊँ ना मैं, अंधेरे में कभी। दीपक की तरह जलना सिखाया।। इस सफर में क्या ज़रूरी है, ज़िन्दगी का वो पहलू दिखाया। मैं कौन हूँ मुझको ये बतलाया।। Sonam Kharwar

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कविता शायरी 

तुम ना होते

तुम ना होते, तो क्या होता। ज़िन्दगी का तज़ुर्बा, कुछ नया होता। मिलने को तुझसे, मन परेशान ना होता। हर वक्त लबों पे, तेरा नाम ना होता। देख कर तुझको, दिल बेईमान ना होता। यारी का तेरी, अभिमान ना होता। खुद से भी ज्यादा, तेरा ख़्याल ना होता। हर कदम पे मेरे, तेरा साथ ना होता। ख़्वाबों में तेरा, इंतेज़ार ना होता। और हमें तुमसे, प्यार ना होता। Sonam Kharwar

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कविता शायरी 

घुमक्कड़ी

घुमक्कड़ी भी कला है, घुमक्कडों से पूछो। सफर ये बड़ा है, थोड़ा तो सोचो।। मंज़िल नही है कोई, जिज्ञासा अथाह है। दिल भी ना जाने, की जाना कहाँ है।। राहें बनी है साथी, हवाओं में नशा है। डूबते हैं इसमें, तैरना किसे पता है।। खड़ी वादियाँ, बाहें फैलाए। मानों ये जैसे, मुझे बुलाए।। कदमों को जैसे, रुकना नही है। चलते है रहना, थकना नहीं है।। खो कर सफर में, पा लूँ मैं खुद को। की मौत भी मेरी, हँसीन बन जाए।। Sonam Kharwar

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कविता शायरी 

भारत

हिन्दू-मुस्लिम सब समान हैं, हर जाति-धर्म का मान है। भारत तो एक वरदान है।। युद्ध भूमि में लड़ने को, हाज़िर अपनी ये जान है। भारत तो एक वरदान है।। देख के ताकत भारत की, दुश्मन भी परेशान है। भारत तो एक वरदान है।। संस्कृतियों पर अभिमान है, अनेकता में एकता बलवान है। भारत तो एक वरदान है।। भारतवासी को इस पर शान है, अपना देश महान है। भारत तो एक वरदान है।। Sonam Kharwar

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कविता हिन्दी लेख 

राजनीतिक दलों से ऊँचा होता नेताओं का क़द!!

आज हमारे देश की राजनीति एक अलग ही दिशा में मुड़ गई है, एक नयी करवट ले रही है| आज ये दल अपनी पहचान खोते जा रहें है, पहले इन दलों की पहचान इनकी नीति से होती थी कि कौन सा दल किस का अनुसरण करता है| पर आज पार्टियाँ अपने नेता के नाम से ही जानी जाती है, प्रत्येक दल में एक ऐसा नेता होता है जिसकी सुनी जाती है ,बस वही सर्वे सर्वा| किसी एक पार्टी की बात नही है, राष्ट्रीयदल हो या क्षेत्रीय पार्टियाँ सब में एक ऐसा नेता होता है जिसका क़द पार्टी से भी ऊपर होता है| अब कोंग्रेस को देखे तो सारे दिग्गज नेता किनारे पर बैठें है, बस सब राहुल जी की सुनते है और वो क्या क्या कहते हैं विचारणीय है| भारतीय जनता पार्टी जब जनसंघ हुआ करती थी तब एक मज़बूत लोकतांत्रिक दल था, बड़े बड़े धुरन्धर नेताओ की लम्बी लाइन थी पर अब यहाँ भी बस मोदीजी और अमित शाह के मन की बात सुनी जाती है| पहले तो राजनीति परिवारों ने सम्भाली पर अब तो सब अपनी अपनी दुकान खोले बैठे है, सब को कुर्सी का मोह है| किसी भी सांसद या विधायक को यदि कोई पद नही मिलता वो बस अपना एक अलग दल बना लेता है और उस पार्टी को उसीव्यक्ति के नाम से जाना जाता है, अब मायावती की बहुजन समाज पार्टी में बस बुआ जी की ही चलती है तो समाज वादी में बस अखिलेश जी साइकल चला रहें हैं| बंगाल को दीदी सम्भाले बैठी है तो दिल्ली को केजरीवाल जी, जहाँ ,जिधर भी देखे सभी पार्टियाँ बस एक ही नेता पर निर्भर हो गई है| सारी योजना ,नीतियाँ सब उसी के अदेशानुसर, कोई दल लोकतांत्रिक तरीक़े से नही चल रहा| सब की दृष्टि बस कुर्सी पर टिकी है येन केन प्रकारेंन बस सत्ता सुख मिल जाए, तो अब हमारे देश की राजनीति धीरे धीरे तानाशाही की ओर बढ़ रही है| विकल्प कोई है नही देश के पास, अब कोई जयप्रकाश जी जैसा आए और देश को सही राह पर ले जाए अन्यथा तो इनको ही सौपनी है पतवार| देश की नैया अब डूबने से कौन बचाये? Usha Kedia

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Opinion Social Media कविता हिन्दी लेख 

हम भारत के लोग ……

हम भारतवासी अपने पूरे होशों हवास में शपथ लेते हैं कि हम भारत को अखण्ड नही रहने देंगे ! हम भारत वासी शपथ लेते हैं की देश हित का सोचने वालों को मरने पर विवश कर देंगे. पूरे सोच विचार के पश्चात हम भारत के लोग यह प्रण लेते हैं की अपने हितो पर देश हित की बलि चढ़ाने में संकोच नही करेंगे. हम बस उसी पार्टी की सरकार बनाने में सहयोग करेंगे जिससे हमारे स्वार्थ सिद्ध होंगे. हम भारतवासी पूरा प्रयास करेंगे कि देश भ्रष्टाचार से मुक्त ना हो सके. साफ़ सुथरी सरकार और ईमानदार नेता हमारी राह के रोड़े हैं. सही ग़लत की परवाह किए बिना हम चन्द रूपयों में अपना वोट बेच देंगे. हम सभी भारत के लोग अपनी पहचान अपने धर्म के आधार पर बताएँगे. जैसे हिन्दू,मुसलमान,सिख या ईसाई आदि. राजनीति भी हम जात पात के आधार पर ही करेंगे. यदि किसी के साथ दुर्व्यवहार होता है या किसी की हत्या हो जाती है तो सबसे पहले उसका धर्म और जाति पूछी जानी चाहिए. हम उसके बाद फ़ैसला करेंगे की दोष किसका है. आप को क्या लगता है? ये अंगर्ल प्रलाप है!! हमारे देश में बस यही हो रहा है. देश की सोचने वालों की बलि ली जाती है. देशद्रोही सरेआम खुले घूमते है. श्री राम कहने वालों को जेल की सज़ा की माँग होती है. हिंदुस्तान मुर्दाबाद , भारत तेरे टुकड़े होंगे. ऐसा कहने वाले मीडिया में हीरो बन गये. कोई दुस्साहस नही करता उन्हें जेल भेजने का. सेना को सर्जिकल की सफ़ाई देनी पड़ती है! आतंकवादियो और पत्थर बाजों पर रहम दिखाया जाता है. सेना को मरने के लिए सीमा पर बिठा रखा है और अलगाववादियों को सर पर. इन हालातों में एक नया शपथ पत्र बन जाना चाहिए . हम भारत के लोग अब देश की सुरक्षा की बात नही करेंगे बस अपना कुनबॉ पालेंगे. जय हिंद कहे या मैं महान ! मेरा स्वार्थ महान . देश बन जाए बे ईमान!!! Usha Kedia

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कविता शायरी 

ज़िन्दगी का सामना

जब अंत है मौत, तो किस्से दरें हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। आंसुओं से लड़, खुशियों को जीते हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। अपनो से हार, तेरा दिल जीतें हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। खुद को सम्भाल, आगे बढ़े हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। लबों की मुस्कान, कहीं जाने ना दे हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। मुश्किल जो आये, बिल्कुल ना डरें हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना करें हम।। ज़ख्मों को अपने, चलो भूल जाएं हम। आ ज़िन्दगी तेरा सामना…

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कविता शायरी 

बचपन

चल लौट चलें उस दुनिया में, कुछ वर्ष पुरानी बगिया में। जब हम छोटे बच्चे थे, दिल के पूरे सच्चे थे। बस हँसना रोना आता था, कभी ना दिल ख़बराता था। संग हमारा तगड़ा था, बस दो पल का ही झगड़ा था। खेल थे इतने की फुरसत ना थी, पैसे की भी ज़रूरत ना थी। ऑफिस ना ड्यूटी जाना था, बस स्कूल से घर को आना था। संसार बड़ा ही छोटा था, माँ के पल्लू में सोता था। चाहत चाँद को पाने की थी, जल्दी से बड़े हो जाने की…

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कविता शायरी 

गरीब

इंसान को इंसान से, बहुत दूर कर जाती है। वो और कुछ नही मित्र, गरीबी कहलाती है। बरसात की बझाड़ में, भीगता शरीर है। महँगाई की मार में, काँपता गरीब है, कभी भूखे पेट ही रहता है, और बीमारियों से लड़ता है। दो रोटी को भी तरसता है, ना जाने कहाँ वो भटकता है। तन मलीन हो जाता है, पर मन पवित्र कहलाता है। यही मानकर वो गरीब, धरती पर सो जाता है। वो कैसा हुनर जानता है, मुश्किल में मुस्काता है। सूखी हड्डी का शरीर लिए, चट्टानों से भी…

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कविता शायरी 

मुझे याद रहोगे तुम

तुम्हे याद हमारी आये ना आये, हम रोज़ ही तुझको सोचेंगे। एक छोटी सी तस्वीर रखी है, तुझे रोज़ सवेरे देखेंगे। इंतेज़ार मेरा तुम्हे हो ना हो, हम बे-सबर हमेशा बैठेंगे। मीलों की दूरी हो तो भी, ख़्वाबों में तुझको बुन लेंगे। तुम्हे दो पल की फुरसत हो न हो, बातें हम अपनी सब कह देंगे। बैठ आसमाँ के नीचे हम, चाँद से बातें कर लेंगे। तुम्हे मिलने की चाहत हो ना हो, हम रोज़ ही तुमसे मिल लेंगे। यादों का पिटारा संग में होगा, जब चाहे तुझे जी लेंगे।…

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