कविता शायरी 

चलो यादें बनाते हैं

उस पुराने दुश्मन से मिल आते हैं, अपने दिल की कड़वाहट मिटाते हैं। एक कप चाय पिलाते हैं, सारे गीले-शिकवे भूल जाते हैं। चलो यादें बनाते हैं। उन बेड़ियों की जकड़न से, कहीं दूर जाते हैं। घर से बाहर निकल, उन रातों में खो जाते हैं। चलो यादें बनाते हैं। किसी से दिल लगाते हैं, और आशिक़ कहलाते हैं। या इन रिलेशनशिप के चक्कर में, नही आते हैं। चलो यादें बनाते हैं। कुछ पल के लिये, इन जिम्मेदारियों को छोड़ जाते हैं। उन बचपन की गलियों में, थोड़ा घूम आते…

Read More
कविता शायरी 

मेरे जज़्बात की कहानी

यूँही नही ये दिल भारी है, आज इश्क़ की बाज़ी हारी है। वो जान के भी अनजानी है, चलो गलती हमने ही मानी है। हर किस्सा तेरा नुरानी है, जज़्बात की मेरी कहानी है। तुम प्यार हो मेरा! दोस्त नही, ये बात देर से जानी है। रंगों की महफ़िल सजी हुई है, आज तो उसकी सगाई है। हार गया ये दिल मेरा अब, देख कर उसकी विदाई है। थाम कर मेरा हाथ वो पगली, बोल गई वो लाइन पुरानी। “मेरी याद तो तुझको आएगी न” अब ये बात भी उसको…

Read More
कविता शायरी 

दिल टूट गया है

देख सखी! दिल टूट गया है, मेरा सजन-सखा यूँ रूठ गया है। ख़ता हुई न जाने क्या है, किस बात की मुझको मिली सजा है। कहते थे इश्क़ बेपनाह है, ख़ुदा से हमने तुमको चुना है। अब कहाँ गया वो इश्क़ पुराना, तेरा खुदा से मुझको माँग लाना। हर अदा पे मेरी मुस्कुराना, साथ में मेरे वक़्त बिताना। मेरे सपनों का एक महल बनाना, और धीरे से मुझे छोड़ है जाना। ख़ता तो है बस एक बहाना, तुझे तो मुझसे दूर था जाना। तुम बदल गए और चले गये, हम…

Read More
कविता शायरी 

किसान

सूखा पड़ा, बंज़र ज़मीन, उसमें है बैठा एक गरीब। है आस आंखों में भरी, जननी है जिसकी बस कृषि। चेहरे की जिसकी वो हंसी, बारिश की बूंदों में छुपी, अपने किसान की जान भी, धरती के टुकड़े में बसी। आज़ादी की लड़ी लड़ाई, हरित क्रांति भी थी आई। फिर भी प्यासा किसान भाई, ये कैसी परिवृद्धि आई। सूख गई ये धरती है या, सूख गया ये संसार। पल रहा है जिसके टुकड़ों पर, उसी को लूट रहा इंसान। हे अन्नदाता! तुम हो महान, तुम सा न कोई इस जहान। सहते…

Read More
कविता शायरी 

होली

ओरी होरी! भेज संदेशा, बोल पिया को जल्दी आयें। तेरा नीला-पीला रंग क्या मोहेगा, मोहे तो पिया का रंग ही भाये। पिया का रंग गहरा है इतना, छोड़-छुड़ावै ना छूटेगा। तेरा गहरा रंग भी ढल जाएगा, पिया के आगे कुछ न टिकेगा। जो रंग दे तू मेरे अंग को रंग में, धो दूंगी जल से पल में। पर पिया के रंग को कैसे धोदूँ, जो रचा हुआ है अंतर्मन में। ओरी होली! आजा रंग दे, थोड़ा अपने रंग में रंग ले। देख पिया जिससे जल जायें, भागे-भागे घर को आयें।…

Read More
कविता शायरी 

खुद को तू पहचान ले मानव

जा रहा है तू किस दिशा में मानव, उस पथ की तू जाँच तो करले। आगे बढ़ने से पहले मानव, खुद की तू पहचान तो करले। देख रहा है जो तू मानव, अंधकार की सीढ़ी है वो। एक बार खुद में तू झाँक ले, चमत्कार तुझमें ही है वो। जान ले मानव एक सत्य तू, परम शक्ति का है तत्व तू। भटक रहा है यहाँ-वहाँ क्यों, समझ ले पहले स्वंय की गुत्थी तू। चेतन, अर्धचेतन और अचेतन, तीन तरह से बटाँ हुआ मन। अगर तुझे है जो भी पाना, इसी…

Read More
Bollywood Entertainment कविता शायरी 

गुलजार की 10 बेहतरीन कविताएं और गीत

शब्दों के जादूगर सम्पूर्ण सिंह कालरा उर्फ गुलजार किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। साहित्य, समाज और कला में रुचि रखने वाला हर व्यक्ति उन्हे बखूबी जनता है। पेश है उनकी 10 सबसे बेहतरीन कविताएं/शायरियाँ: 1. मोरा गोरा अंग लइ ले मोहे शाम रंग दइ दे छुप जाऊँगी रात ही में मोहे पी का संग दइ दे 2. थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है ज़िंदगी फिर भी अहा ख़ूबसूरत है थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है ज़रूरत है… 3.तेरे बिना ज़िंदगी से कोई, शिकवा, तो नहीं, शिकवा नहीं शिकवा नहीं,…

Read More
कविता शायरी 

बनना है तो हवा बनो

बनना है तो हवा बनो, बस यहाँ-वहाँ तुम मस्त बहो। इस रंग बदलती दुनिया में, तुम रंगहीन मानव बनो। थाम सके ना कोई तुमको, ऐसी तुम रफ्तार धरो। काँप उठे हर जर्रा दुश्मन का, तेज़ प्रचंड तूफान बनो। पल-पल तपते क्रोधी मानव, शीतल वायु का वेग धरो। सरल-सुगम सब हो जाएगा, व्यर्थ भावना को तो तजो। त्याग के सारी दुनिया-दारी, मंद पवन की सुगन्ध बनो। भीने-भीने इस प्रवाह में मानव, खुद की तुम पहचान करो। Sonam Kharwar

Read More
कविता शायरी 

अत्याचारी मानव

धरती भी एक दिन बोल पड़ेगी, अत्याचारी मानव की पोल खुलेगी। अनन्त काल की गाथा है ये, कब तक सारे दर्द सहेगी।   काँप उठेगा जग ये सारा, जब वो अपने दर्द कहेगी। अश्रुओं की लम्बी धार बहेगी, घायल पृथ्वी इज़हार करेगी।   जाने वो कैसा आलम होगा, जब धरती-मानव की बात छिड़ेगी, गलतियों की लंबी लिस्ट बनेगी, धरती जुर्माना चार्ज करेगी।   बोझ तले एहसानों के दबके, स्वार्थ भावना खंडित होगी। जब युद्ध में परास्त मानव होगा, तभी तो उसकी आँख खुलेगी। Sonam Kharwar

Read More
कविता शायरी 

तेरी-मेरी दोस्ती

छोटा सा एक बच्चा था, मासूम बहुत ही लगता था। माँ का था वो राज-दुलारा, शर्मिला सा बहुत ही प्यारा। एक खेल खुदा ने ऐसा रचाया, गरिमा से कैम्प में तुझे मिलाया। हुस्न ने उसके तुझे हराया, ना जाने कैसा जादू चलाया। हर अदा पे उसकी तू मरता था, पर कहने से तू डरता था। प्यार वो तेरा पहला था, एहसास ही कुछ अलबेला था। प्यार बना तेरा खुंखार, जान की बाजी लगी कई बार। डर गई गरिमा, अब हो क्या? टब गयी बात सरगम के पास। फिर शुरू हुई…

Read More