कविता शायरी 

बनना है तो हवा बनो

बनना है तो हवा बनो,
बस यहाँ-वहाँ तुम मस्त बहो।
इस रंग बदलती दुनिया में,
तुम रंगहीन मानव बनो।

थाम सके ना कोई तुमको,
ऐसी तुम रफ्तार धरो।
काँप उठे हर जर्रा दुश्मन का,
तेज़ प्रचंड तूफान बनो।

पल-पल तपते क्रोधी मानव,
शीतल वायु का वेग धरो।
सरल-सुगम सब हो जाएगा,
व्यर्थ भावना को तो तजो।

त्याग के सारी दुनिया-दारी,
मंद पवन की सुगन्ध बनो।
भीने-भीने इस प्रवाह में मानव,
खुद की तुम पहचान करो।

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2 Thoughts to “बनना है तो हवा बनो”

  1. Jivnesh tyagi

    Awesome ???❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

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