कविता शायरी 

अत्याचारी मानव

धरती भी एक दिन बोल पड़ेगी, अत्याचारी मानव की पोल खुलेगी। अनन्त काल की गाथा है ये, कब तक सारे दर्द सहेगी।   काँप उठेगा जग ये सारा, जब वो अपने दर्द कहेगी। अश्रुओं की लम्बी धार बहेगी, घायल पृथ्वी इज़हार करेगी।   जाने वो कैसा आलम होगा, जब धरती-मानव की बात छिड़ेगी, गलतियों की लंबी लिस्ट बनेगी, धरती जुर्माना चार्ज करेगी।   बोझ तले एहसानों के दबके, स्वार्थ भावना खंडित होगी। जब युद्ध में परास्त मानव होगा, तभी तो उसकी आँख खुलेगी। Sonam Kharwar

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