गुलजार की 10 बेहतरीन कविताएं और गीत
शब्दों के जादूगर सम्पूर्ण सिंह कालरा उर्फ गुलजार किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। साहित्य, समाज और कला में रुचि रखने वाला हर व्यक्ति उन्हे बखूबी जनता है। पेश है उनकी 10 सबसे बेहतरीन कविताएं/शायरियाँ:
1. मोरा गोरा अंग लइ ले
मोहे शाम रंग दइ दे
छुप जाऊँगी रात ही में
मोहे पी का संग दइ दे
2. थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है
ज़िंदगी फिर भी अहा ख़ूबसूरत है
थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है
ज़रूरत है…
3.तेरे बिना ज़िंदगी से कोई, शिकवा, तो नहीं,
शिकवा नहीं
शिकवा नहीं, शिकवा नहीं
तेरे बिना ज़िंदगी भी लेकिन, ज़िंदगी, तो नहीं,
ज़िंदगी नहीं
ज़िंदगी नहीं, ज़िंदगी नहीं
4. मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
ओ ओ ओ ! सावन के कुछ भीगे भीगे दिन रखे हैं
और मेरे एक खत में लिपटी रात पड़ी है
वो रात भुला दो, मेरा वो सामान लौटा दो
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
5. आने वाला पल जाने वाला है
हो सके तो इस में
ज़िंदगी बिता दो
पल जो ये जाने वाला है
एक बार यूँ मिली, मासूम सी कली
खिलते हुए कहा
खुश पाश मैं चली
देखा तो यहीं हैं
ढूँढा तो नहीं हैं
पल जो ये जाने वाला हैं…
6. ऐ अजनबी तू भी कभी आवाज़ दे कहीं से
मैं यहाँ टुकड़ों में जी रहा हूँ
तू कहीं टुकड़ों में जी रही है
ऐ अजनबी तू भी कभी…
रोज़ रोज़ रेशम सी हवा, आते जाते कहती है
बता रेशम सी हवा कहती है बता
वो जो दूध धुली, मासूम कली
वो है कहाँ कहाँ है वो रोशनी, कहाँ है
वो जान सी कहाँ है
मैं अधूरा, तू अधूरी जी रही है
ऐ अजनबी तू भी कभी …
7. लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
घोड़ा पहुंचा चौक में चौक में था नाई
घोड़ेजी की नाई ने हज़ामत जो बनाई
चग-बग चग-बग चग-बग चग-बग
घोड़ा पहुंचा चौक …
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
8. सुरमई अखियों में नन्हा मुन्ना एक सपना दे जा रे
निन्दिया के उदते पाखी रे, अँखियों में आजा साथी रे
9. मैं ने तेरे लिये ही सात रंग के सपने चुने
सपने सुरीले सपने
कुछ हँस के, कुछ ग़म के
तेरी आँखों के साए चुराए
रसीली यादों ने
मैं ने तेरे लिये…
10. मुसाफ़िर हूँ मैं यारों
ना घर है ना ठिकाना
मुझे चलते जाना है, बस, चलते जाना
मुसाफ़िर…
एक राह रुक गई, तो और जुड़ गई
मैं मुड़ा तो साथ-साथ, राह मुड़ गई
हवा के परों पे, मेरा आशियाना
मुसाफ़िर…

