खुद को तू पहचान ले मानव
जा रहा है तू किस दिशा में मानव,
उस पथ की तू जाँच तो करले।
आगे बढ़ने से पहले मानव,
खुद की तू पहचान तो करले।
देख रहा है जो तू मानव,
अंधकार की सीढ़ी है वो।
एक बार खुद में तू झाँक ले,
चमत्कार तुझमें ही है वो।
जान ले मानव एक सत्य तू,
परम शक्ति का है तत्व तू।
भटक रहा है यहाँ-वहाँ क्यों,
समझ ले पहले स्वंय की गुत्थी तू।
चेतन, अर्धचेतन और अचेतन,
तीन तरह से बटाँ हुआ मन।
अगर तुझे है जो भी पाना,
इसी का ज्ञान तुझे अपनाना।
तेरे विचार ही तुझको विकसित करते,
सकारात्मक ऊर्जा भरते।
फिर यहाँ-वहाँ क्यों मन को तू मारे,
परम शक्ति में ध्यान लगा ले।
जान ले मानव उस परम शक्ति को,
जिसका है तू अटूट साथी।
पहचान ले मानव खुद को ही तू,
बस इतना ही ये सृष्टि चाहती।

