कविता हिन्दी लेख 

राजनीतिक दलों से ऊँचा होता नेताओं का क़द!!

आज हमारे देश की राजनीति एक अलग ही दिशा में मुड़ गई है, एक नयी करवट ले रही है| आज ये दल अपनी पहचान खोते जा रहें है, पहले इन दलों की पहचान इनकी नीति से होती थी कि कौन सा दल किस का अनुसरण करता है| पर आज पार्टियाँ अपने नेता के नाम से ही जानी जाती है, प्रत्येक दल में एक ऐसा नेता होता है जिसकी सुनी जाती है ,बस वही सर्वे सर्वा| किसी एक पार्टी की बात नही है, राष्ट्रीयदल हो या क्षेत्रीय पार्टियाँ सब में एक ऐसा नेता होता है जिसका क़द पार्टी से भी ऊपर होता है| अब कोंग्रेस को देखे तो सारे दिग्गज नेता किनारे पर बैठें है, बस सब राहुल जी की सुनते है और वो क्या क्या कहते हैं विचारणीय है| भारतीय जनता पार्टी जब जनसंघ हुआ करती थी तब एक मज़बूत लोकतांत्रिक दल था, बड़े बड़े धुरन्धर नेताओ की लम्बी लाइन थी पर अब यहाँ भी बस मोदीजी और अमित शाह के मन की बात सुनी जाती है| पहले तो राजनीति परिवारों ने सम्भाली पर अब तो सब अपनी अपनी दुकान खोले बैठे है, सब को कुर्सी का मोह है| किसी भी सांसद या विधायक को यदि कोई पद नही मिलता वो बस अपना एक अलग दल बना लेता है और उस पार्टी को उसीव्यक्ति के नाम से जाना जाता है, अब मायावती की बहुजन समाज पार्टी में बस बुआ जी की ही चलती है तो समाज वादी में बस अखिलेश जी साइकल चला रहें हैं| बंगाल को दीदी सम्भाले बैठी है तो दिल्ली को केजरीवाल जी, जहाँ ,जिधर भी देखे सभी पार्टियाँ बस एक ही नेता पर निर्भर हो गई है| सारी योजना ,नीतियाँ सब उसी के अदेशानुसर, कोई दल लोकतांत्रिक तरीक़े से नही चल रहा| सब की दृष्टि बस कुर्सी पर टिकी है येन केन प्रकारेंन बस सत्ता सुख मिल जाए, तो अब हमारे देश की राजनीति धीरे धीरे तानाशाही की ओर बढ़ रही है| विकल्प कोई है नही देश के पास, अब कोई जयप्रकाश जी जैसा आए और देश को सही राह पर ले जाए अन्यथा तो इनको ही सौपनी है पतवार| देश की नैया अब डूबने से कौन बचाये? Usha Kedia

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कमल ने किया कमाल, पर रह गया मलाल!

बीजेपी ने कर्नाटक जीत लिया। कमल ख़ूब खिला। अमित शाह और मोदी की जोड़ी ने कमाल कर दिया। पर थोड़ा मलाल तो रह गया। काश आँकड़ा कुछ आगे बढ़ गया होता। काश कमल  ११२ को छू लेता, ख़ुशी दुगनी हो जाती। पर क्या अफ़सोस करना!ये हमारे देश की राजनीति है। यहाँ नम्बर गेम चलता है। दो सीटें जीतकर जो पार्टी अपनी सरकार बना सकती है उसके पास अब तो १०८ है। साम, दान, दण्ड और भेद। राजनीति के हथियार है। सब अपनाए जायेंगे।दूसरी ओर JDS  सरकार बनाने को बेक़रार है।…

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