बचपन
चल लौट चलें उस दुनिया में,
कुछ वर्ष पुरानी बगिया में।
जब हम छोटे बच्चे थे,
दिल के पूरे सच्चे थे।
बस हँसना रोना आता था,
कभी ना दिल ख़बराता था।
संग हमारा तगड़ा था,
बस दो पल का ही झगड़ा था।
खेल थे इतने की फुरसत ना थी,
पैसे की भी ज़रूरत ना थी।
ऑफिस ना ड्यूटी जाना था,
बस स्कूल से घर को आना था।
संसार बड़ा ही छोटा था,
माँ के पल्लू में सोता था।
चाहत चाँद को पाने की थी,
जल्दी से बड़े हो जाने की थी।

