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भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के बीच शुरू हो गई है जुबानी जंग

लोकसभा चुनाव के दौर  के देखते हुए  देश की  दो शीर्षस्थ एवं प्रशस्त पार्टियां कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच चुनावी जुबानी जंग छिड़ चुकी है ।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी सभा में एक बयान दिया था । जिसमें उन्होंने कहा कि नोटबंदी के चलते ही मां और बेटे जमानत पर हैं वरना हवालात में होते । इस पर कांग्रेस पार्टी ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया जताई है । पार्टी के आलाकमान का कहना है कि कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जो ब्रिटिश काल से ही ऐसे…

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Breaking News News हिन्दी लेख 

राहुल गांधी की पॉलिसी है देश को तोड़ने वाली-अमित शाह

बीजेपी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने  राहुल गांधी पर आरोप लगाया है कि उनकी सारी योजनाएं देश को तोड़ने वाली योजनाएं हैं ना कि उन्हें जोड़कर विकास करने वाली । तेलंगाना में सत्ता परिवर्तन का आवाहन करते हुए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि नाम तो टीआरएस और ना ही मुख्य विपक्षी कांग्रेस राज्य में विकास कर सकते हैं । उन्होंने ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व अगले साल 2019 में होने वाले…

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कविता हिन्दी लेख 

राजनीतिक दलों से ऊँचा होता नेताओं का क़द!!

आज हमारे देश की राजनीति एक अलग ही दिशा में मुड़ गई है, एक नयी करवट ले रही है| आज ये दल अपनी पहचान खोते जा रहें है, पहले इन दलों की पहचान इनकी नीति से होती थी कि कौन सा दल किस का अनुसरण करता है| पर आज पार्टियाँ अपने नेता के नाम से ही जानी जाती है, प्रत्येक दल में एक ऐसा नेता होता है जिसकी सुनी जाती है ,बस वही सर्वे सर्वा| किसी एक पार्टी की बात नही है, राष्ट्रीयदल हो या क्षेत्रीय पार्टियाँ सब में एक ऐसा नेता होता है जिसका क़द पार्टी से भी ऊपर होता है| अब कोंग्रेस को देखे तो सारे दिग्गज नेता किनारे पर बैठें है, बस सब राहुल जी की सुनते है और वो क्या क्या कहते हैं विचारणीय है| भारतीय जनता पार्टी जब जनसंघ हुआ करती थी तब एक मज़बूत लोकतांत्रिक दल था, बड़े बड़े धुरन्धर नेताओ की लम्बी लाइन थी पर अब यहाँ भी बस मोदीजी और अमित शाह के मन की बात सुनी जाती है| पहले तो राजनीति परिवारों ने सम्भाली पर अब तो सब अपनी अपनी दुकान खोले बैठे है, सब को कुर्सी का मोह है| किसी भी सांसद या विधायक को यदि कोई पद नही मिलता वो बस अपना एक अलग दल बना लेता है और उस पार्टी को उसीव्यक्ति के नाम से जाना जाता है, अब मायावती की बहुजन समाज पार्टी में बस बुआ जी की ही चलती है तो समाज वादी में बस अखिलेश जी साइकल चला रहें हैं| बंगाल को दीदी सम्भाले बैठी है तो दिल्ली को केजरीवाल जी, जहाँ ,जिधर भी देखे सभी पार्टियाँ बस एक ही नेता पर निर्भर हो गई है| सारी योजना ,नीतियाँ सब उसी के अदेशानुसर, कोई दल लोकतांत्रिक तरीक़े से नही चल रहा| सब की दृष्टि बस कुर्सी पर टिकी है येन केन प्रकारेंन बस सत्ता सुख मिल जाए, तो अब हमारे देश की राजनीति धीरे धीरे तानाशाही की ओर बढ़ रही है| विकल्प कोई है नही देश के पास, अब कोई जयप्रकाश जी जैसा आए और देश को सही राह पर ले जाए अन्यथा तो इनको ही सौपनी है पतवार| देश की नैया अब डूबने से कौन बचाये? Usha Kedia

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News Opinion हिन्दी लेख 

हड़ताल की जाँच पड़ताल

हमारे शहर के सफ़ाई कर्मचारी कई दिनों से हड़ताल पर है. शहर की साफ़ सफ़ाई पहले भी बहुत अच्छी नही थी पर अब तो हालात बदतर हो गये है. हड़ताली कर्मचारियों की अपनी यूनियन है तो बाहर वालों को बुला कर भी सफ़ाई नही करवा सकते. थोड़ा प्रयास किया गया था पर बाहर वालों को काम नही करने दिया गया. अपने देश में हड़ताल का अभिप्राय यही है “काम रोको”! स्कूल या कॉलेज में हड़ताल होती है तो छात्र सड़कों पर उतर आते है. तोड़ फोड़, सरकारी सम्पत्ति के साथ…

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Opinion हिन्दी लेख 

दो नावों की सवारी, किस पर पड़ती है भारी!!

हमारे देश की राजनीति के कुछ अलग से क़ानून क़ायदे हैं. हमें बचपन से सिखाया जाता है की दो नावों की सवारी करने वाला अक्सर डूब जाता है. पर भारत में बड़े बड़े नेता बड़ी शान से दो नावों की सवारी करते है और पार उतर जाते हैं. डूबता है तो जनता का पैसा और समय भारी पड़ती है हम सब पर. आप अक्सर लोक सभा और विधान सभा चुनावों के समय देखते है कि सभी बड़े बड़े दिग्गज नेता दो सीटों पर चुनाव लड़ते है. कभी तो दोनो सीटों…

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Opinion हिन्दी लेख 

हिंदुस्तान और पाकिस्तान की बराबरी!! कभी नही!

हिंदुस्तान बस हमारा हिंदुस्तान है. इसकी तुलना किसी से नही की जा सकती. पाकिस्तान से तो बिलकुल नही. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र, तेज़ी से विकास करता हुआ, सारी दुनिया पर अपनी एक अच्छी छवि बनाता हिंदुस्तान. एक परिवार या बड़े कुनबे सा पसरा हुआ, सभी धर्मों को समेटे हमारे हिंदुस्तान को किसी परिचय की कोई आवश्यकता नही है. दूसरी ओर हिंदुस्तान से छिटक कर गिरा ज़मीन का एक टुकड़ा पाकिस्तान जों बस आतंक का पर्यायवाची है. यहाँ आतंक और नफ़रत की फ़सल बोई जाती है, जिसे हम हिंदुस्तानियों के…

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जनादेश या जुगाड़ु आदेश!

कर्नाटक का नाटक समाप्त हो गया. सबसे बड़ी पार्टी ने दावा किया कि जनादेश हमारे पक्ष में है और बिना नम्बरों के फुर्ती में सरकार बना ली. दो घोर विरोधी दल जो एक दूसरे का विरोध करते हुए चुनावी मैदान में उतरे थे, चुनावों का परिणाम आते ही एक हो गये. जनादेश को उन्होंने जुगाड़ू आदेश बना लिया. अब इनकी सरकार बनेगी. जनता का फ़ैसला ही कुछ ऐसा था. पर जनता भी क्या करे. कोई दूध का धुला नही है तो वोट बिखर जाते है. बहुत ख़राब और कम ख़राब…

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वाराणसी पुल दुर्घटना – हादसा या हत्या!!

ये जो वाराणसी में १८ लोग मारे गये ये सीमा पर शहीद नही हुए और ना ही ये किसी आतंकवादी की गोली का शिकार हुए है। इनका क़सूर बस इतना था कि ये अपने घरों से निकल कर बनारस की सड़कों पर आ गये थे। ये जो हादसा हुआ, इस प्रकार के हादसे हमारे देश में आए दिन होते हैं। कभी राजधानी दिल्ली में तो कभी हमारे मोदी जी के शहर में और योगी जी के राज में। इन हादसों की किसी की कोई ज़िम्मेदारी नही है। कुछ अफ़सर ससपेंड होते…

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कमल ने किया कमाल, पर रह गया मलाल!

बीजेपी ने कर्नाटक जीत लिया। कमल ख़ूब खिला। अमित शाह और मोदी की जोड़ी ने कमाल कर दिया। पर थोड़ा मलाल तो रह गया। काश आँकड़ा कुछ आगे बढ़ गया होता। काश कमल  ११२ को छू लेता, ख़ुशी दुगनी हो जाती। पर क्या अफ़सोस करना!ये हमारे देश की राजनीति है। यहाँ नम्बर गेम चलता है। दो सीटें जीतकर जो पार्टी अपनी सरकार बना सकती है उसके पास अब तो १०८ है। साम, दान, दण्ड और भेद। राजनीति के हथियार है। सब अपनाए जायेंगे।दूसरी ओर JDS  सरकार बनाने को बेक़रार है।…

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Opinion हिन्दी लेख 

धर्म के नाम पर

धर्म के नाम पर फलता फूलता अधर्म… लोग अक्सर सड़क किनारे किसी पेड़ के नीचे एक पत्थर रख देते है। उस पर लाल या पीला कुछ लगा देते है, बस हो गया। आने जाने वाले लोग पहले तो ज़रा सा सर झुका कर निकल लेते हैं पर धीरे धीरे चढ़ावा, फूल और प्रसाद भी चढ़ने लगता है। समय के साथ उस पेड़ के आसपास की ज़मीन उस तथकथित मंदिर की हो जाती है। ये है हमारे देश में धर्म का स्वरूप! यहाँ धर्म के नाम पर ऐसे अधर्म सभी गाँवों…

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