Opinion हिन्दी लेख 

धर्म के नाम पर

धर्म के नाम पर फलता फूलता अधर्म… लोग अक्सर सड़क किनारे किसी पेड़ के नीचे एक पत्थर रख देते है। उस पर लाल या पीला कुछ लगा देते है, बस हो गया। आने जाने वाले लोग पहले तो ज़रा सा सर झुका कर निकल लेते हैं पर धीरे धीरे चढ़ावा, फूल और प्रसाद भी चढ़ने लगता है। समय के साथ उस पेड़ के आसपास की ज़मीन उस तथकथित मंदिर की हो जाती है। ये है हमारे देश में धर्म का स्वरूप! यहाँ धर्म के नाम पर ऐसे अधर्म सभी गाँवों…

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देश माँगे छुट्टी से अवकाश!

सात दिन का सप्ताह और रविवार का अवकाश, बहुत सुखद लगता है। सभी काम करने वाले इस अवकाश का पूरे विश्व में बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा करते है। पर यदि हमारे हिंदुस्तान की बात करे तो यहाँ अवकाश सिर्फ़ रविवार तक सीमित नही है। यहाँ तो हर दूसरे दिन छुट्टी घोषित हो जाती है। कुछ भी हो बस घोषित कर दो अवकाश। आज अगर हम हिसाब लगाएँ तो पता लगेगा की अवकाश छोड़िए कार्य दिवस कितने है हमारे ये सोचें। क़रीब ४८ रविवार नैशनल हॉलिडे, धार्मिक छुट्टियाँ और जब किसी…

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First Indian Woman Opinion हिन्दी लेख 

किरण बेदी- दूषित राजनीति की शिकार

जाओ पहले घर की साफ़ सफ़ाई का ध्यान रखो! खुले में शौच जाना बंद करो! तभी राशन मिलेगा। ऐसा नही लगता कि एक माँ स्कूल से आये अपने बच्चे को आदेश दे रही हो? जूते उतार कर सही जगह रखो, हाथ मुँह धो कर आओ, तभी खाना मिलेगा। माँ समझती है कि उसे भूख लगी होगी पर वह बच्चे में अच्छी आदत डालना चाहती है। किरण बेदी जी की भी मंशा कुछ यही थी कि आदत में सुधार हो। कोई ग़लती नही थी उनकी। ऐसा आदेश वही दे सकता है…

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आज का समाज – रेप की खेप!

अख़बार का पहला पन्ना ही शर्मशार होने को काफ़ी है। सर झुक जाता है शर्म से। चारों ओर बस नकारात्मक समाचार,। उनमें भी सबसे अधिक संख्या उन समाचारों की होती है जो हम स्त्री जाति से सम्बन्धित होते है, रेप, बलात्कार। ना तो इन में धर्म का बन्धन है, ना ही जाति की कोई परवाह। और उम्र तो सात साल की बालिका हो या साठ साल की कोई स्त्री बस दो शब्द यहाँ सटीक बैठते है, नर और मादा। ये दो शब्द हाल बताने को पर्याप्त है। वो नर है…

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Opinion हिन्दी लेख 

दीक्षा के सहारे मोक्ष की इच्छा!

सूरत से निरंतर समाचार आ रहे हैं। खाते पीते, धनी परिवारों के, पढ़े लिखे युवक और युवतियाँ मोक्ष की इच्छा में दीक्षा ग्रहण कर रहें है। आज जब भौतिकवाद चरम पर है, सभी की हार्दिक अभिलाषा होती है कि उनके पास सारे आधुनिक साधन हो। ऐसे में जब ब्रैंड के कपड़े पहनना शान माना जाता है और स्मार्ट फ़ोन जीवन की लाइफ़ लाइन! ऐसे में धर्म, स्वर्ग, सन्यास और मोक्ष जैसे शब्द आश्चर्य चकित करते है। सहज ही विश्वास नही होता कि आज लोग स्वर्ग या मन की शांति के…

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कविता शायरी 

आहत तो होते हैं हम!

बेशक तुम्हें दिखाते नही हैं पर आहत तो होते हैं हम, जब भी कभी तुम दिखाते हो आँखे, सहम जाते हैं हम, ना जाने कितनी उधेड़ बुन से गुज़र कर, देते हैं आवाज़ तुम्हें, पर तुम्हारा वो तुनक कर बात करना, घबरा जातें है हम। वैसे तो कान कम सुनते है, नज़रें भी हैं धुँधली, पर आते जाते तुम्हारे चेहरे के भाव, बख़ूबी पढ़ लेते हैं हम। माना अब वक़्त बदल गया और बदल गई ज़िंदगी, पर याद तो करो जब छोटे से बच्चे थे तुम, हाथ पकड़ तुम्हारा दुनिया…

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Cricket Opinion Sports हिन्दी लेख 

सलीब पर टंगा क्रिकेट

आजकल आइ.पी.एल.यानी क्रिकेट का महाकुंभ चल रहा है। चारों तरफ़ बस इसी का शोर है, टी.वी.हो या अख़बार, आइ. पी. एल के विज्ञापन और समाचार। सब में बस आइ.पी.एल. छाया है। पूरे पूरे पेज के विज्ञापन, नई-नई मन को लुभाने वाली, आइ. पी. एल. को बढ़ावा देने वाली ऑफ़र और वह सब जो अधिक पैसा कमाने का माध्यम हो सकता है। इस क्रिकेट में सब कुछ बिकाऊ है। सबसे पहले टीम बिकती है। फिर खिलाड़ियों कीं नीलामी होती है। खेल में लगने वाले चौके, छक्के, गिरते विकेट और बनते रन,…

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Entertainment Humor Opinion हिन्दी लेख 

डूबता सितारा – कपिल शर्मा, ढलता सूरज कपिल शर्मा

एक समय ऐसा भी था जब टी.वी. पर एकता कपूर का साम्राज्य था। सजी धजी भारी भरकम साड़ियाँ ,नक़ली गहने लाल गुलाबी चेहरों वाली औरतें। षड्यंत्र रचती, चालें चलती, चक्रव्यूह रचती औरतें। पुरुषों के पास घरवाली भी, बाहर वाली भी। कब कौन किस की नाजायज़ औलाद निकल जाए पता नही होता था। केवल एकता कपूर ही नही सभी चैनलो पर यही हाल था। सारी बागडोर स्त्रियों के हाथ। सारे घर-बाहर की ज्ञाता स्त्रियाँ। दर्शक ऊब गये थे पर कोई विकल्प नही था। ऐसे में तपती धूप में हवा के झोंके…

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उपवास या फिर उपहास

एक दिन एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के महान नेता गण एक दिन के उपवास का प्रण लेते है। ज़ोर शोर  से राजघाट पर बापू की समाधि के समीप आयोजन होता है। नेता गण भी अपने स्तर पर तैयारी करते है। सुबह सुबह छोले भटूरे के साथ मीठी लस्सी डकार कर ख़ुद को उपवास के लिए भूखा रहने की तैयारी करते है।  इसके अगले ही दिन इनकी घोर विरोधी सत्ताधारी पार्टी इनसे एक क़दम आगे निकलते हुए, देश में अलग अलग स्थानो पर उपवास करने की घोषणा करते है अब इन्हें भी तो भूखा रहना है…

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Cricket Opinion Sports हिन्दी लेख 

कॉमनवेल्थ vs आइ.पी.एल

कॉमनवेल्थ गेम्ज़ अर्थात राष्ट्र मंडल खेल अभी बस पाँच दिन पहले बड़े ही शानदार तरीक़े से प्रारम्भ हुए है। आग़ाज़ के साथ ही हमारे खिलाड़ी लगातार बेहतरीन, प्रशंसा के योग्य अपना प्रदर्शन दिखा रहें है। हमारे ये होनहार लगातार देश के लिए मेडल जीत रहें है। साधुवाद! शाबाश ! बहुत ख़ूब! मीडिया, न्यूज़ चैनल भी थोड़ी बहुत कवरेज दिखा रहें है। अख़बार के पन्नो पर जगह मिल रही है, खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना भी हो रही है। दूसरी ओर भारत में क्रिकेट का महाकुम्भ चल रहा है। वही आइ.पी.एल। पैसों और क्रिकेट…

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