उपवास या फिर उपहास
एक दिन एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के महान नेता गण एक दिन के उपवास का प्रण लेते है। ज़ोर शोर से राजघाट पर बापू की समाधि के समीप आयोजन होता है। नेता गण भी अपने स्तर पर तैयारी करते है। सुबह सुबह छोले भटूरे के साथ मीठी लस्सी डकार कर ख़ुद को उपवास के लिए भूखा रहने की तैयारी करते है।
इसके अगले ही दिन इनकी घोर विरोधी सत्ताधारी पार्टी इनसे एक क़दम आगे निकलते हुए, देश में अलग अलग स्थानो पर उपवास करने की घोषणा करते है अब इन्हें भी तो भूखा रहना है न!
तो ये सब भी सैंडविच खाकर स्वयं को उपवास के लिए तैयार करते है।
एक बात समझ नही आती कि ये उपवास क्यूँ किया जा रहा है? उपवास के नाम पर यह उपहास क्यूँ?
नेतागण यह समझ लें कि अब हमारे देश की जनता इतनी भोली नही रही कि आपके इन तमाशों से प्रभावित होगी।हाँ, था एक ज़माना जब एक अनशन ने सारे देश को प्रभावित किया था और दिल्ली का दिल पसीज गया था। दिल्ली की जनता ने अनशन करने वालों को दिल्ली की सत्ता थाली में परोस कर दे दी थी।
पर अब इतिहास नही दोहराया जाएगा!
आपके झाँसे में अब जनता नही आने वाली!
हाँ, अगर इन नेताओ का ख़ून सफ़ेद ना हुआ हो और आँखो का पानी मरा न हो तो इन्हें उपवास नही समीप वास करना चाहिए। जाना चाहिए उन दुःखी लोगों के पास जिनके साथ अन्याय हो रहा है।
आज देश में निरन्तर रेप केस में वृद्धि होती जा रही है। आरोपी सरेआम खुले घूम रहें हैं, केस सुलझाने को सी बी आइ को मामला अपने हाथ में लेना पड़ता है। तो नेताजी वहाँ जाकर धरना दें, कश्मीर जाकर बलात्कारी लोगों को गिरफ़्तार करवाने को अनशन करे!
देश के हर कोने में अत्याचार हो रहा है, कठुआ हो या उन्नाव। वहाँ जाकर जनता के ज़ख़्मों पर मरहम लगायें। जनता आपका साथ देगी।
एक बात और भी है।
जिस देश में विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे धन्ना सेठ अरबों डकार कर विलासिता की ज़िन्दगी बीता रहें है, उस देश में किसान क़र्ज़ ना चुका पाने के कारण आत्म हत्या कर रहा है। जहाँ च्न्द्रा कोचर का कुछ नही बिगड़ता, वहाँ पाँच सौ की रिश्वत लेने वाला सीधे जेल जाता है। यदि आपको कुछ करना है तो इन मुद्दों पर कुछ करिए. ये जनता है सब समझती है.
हर बात पर राजनीतिक रोटियाँ सेकनी बंद करे!
सच्चे मन से जन सेवा करे जनता स्वयं आपके साथ खड़ी हो जाएगी!
इस तरह के उपवास का आयोजन कर आप अपना उपहास ना बनाये…

