उपवास या फिर उपहास
एक दिन एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के महान नेता गण एक दिन के उपवास का प्रण लेते है। ज़ोर शोर से राजघाट पर बापू की समाधि के समीप आयोजन होता है। नेता गण भी अपने स्तर पर तैयारी करते है। सुबह सुबह छोले भटूरे के साथ मीठी लस्सी डकार कर ख़ुद को उपवास के लिए भूखा रहने की तैयारी करते है। इसके अगले ही दिन इनकी घोर विरोधी सत्ताधारी पार्टी इनसे एक क़दम आगे निकलते हुए, देश में अलग अलग स्थानो पर उपवास करने की घोषणा करते है अब इन्हें भी तो भूखा रहना है…
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