चाय की चुश्की लेने वालों के लिए चिंताजनक खबर, जानिये क्यों Featured Article Knowledge News 

चाय की चुश्की लेने वालों के लिए चिंताजनक खबर, जानिये क्यों

इस समय चाय पीने के शौकीनों के लिए यह बुरी खबर है। चाय उत्पादकों की संस्था भारतीय चाय संघ ने कहा है कि उत्तरी बंगाल का चाय उद्योग पिछले दो-तीन माह से गंभीर संकट से गुजर रहा है। क्षेत्र में कई चाय बागान बंद हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि चाय बागान बंद होने से चाय का उत्पादन प्रभावित होगा। परिणामस्वरूप आने वाले दिनों में चाय पत्ती के दाम और बढ़ सकते हैं। मानसरोवर स्थित अनमोल मोती चाय के निर्माता रांवका ब्रदर्श के जिनेश कुमार जैन ने बताया…

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News Opinion हिन्दी लेख 

हड़ताल की जाँच पड़ताल

हमारे शहर के सफ़ाई कर्मचारी कई दिनों से हड़ताल पर है. शहर की साफ़ सफ़ाई पहले भी बहुत अच्छी नही थी पर अब तो हालात बदतर हो गये है. हड़ताली कर्मचारियों की अपनी यूनियन है तो बाहर वालों को बुला कर भी सफ़ाई नही करवा सकते. थोड़ा प्रयास किया गया था पर बाहर वालों को काम नही करने दिया गया. अपने देश में हड़ताल का अभिप्राय यही है “काम रोको”! स्कूल या कॉलेज में हड़ताल होती है तो छात्र सड़कों पर उतर आते है. तोड़ फोड़, सरकारी सम्पत्ति के साथ…

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Opinion हिन्दी लेख 

दो नावों की सवारी, किस पर पड़ती है भारी!!

हमारे देश की राजनीति के कुछ अलग से क़ानून क़ायदे हैं. हमें बचपन से सिखाया जाता है की दो नावों की सवारी करने वाला अक्सर डूब जाता है. पर भारत में बड़े बड़े नेता बड़ी शान से दो नावों की सवारी करते है और पार उतर जाते हैं. डूबता है तो जनता का पैसा और समय भारी पड़ती है हम सब पर. आप अक्सर लोक सभा और विधान सभा चुनावों के समय देखते है कि सभी बड़े बड़े दिग्गज नेता दो सीटों पर चुनाव लड़ते है. कभी तो दोनो सीटों…

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Opinion हिन्दी लेख 

हिंदुस्तान और पाकिस्तान की बराबरी!! कभी नही!

हिंदुस्तान बस हमारा हिंदुस्तान है. इसकी तुलना किसी से नही की जा सकती. पाकिस्तान से तो बिलकुल नही. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र, तेज़ी से विकास करता हुआ, सारी दुनिया पर अपनी एक अच्छी छवि बनाता हिंदुस्तान. एक परिवार या बड़े कुनबे सा पसरा हुआ, सभी धर्मों को समेटे हमारे हिंदुस्तान को किसी परिचय की कोई आवश्यकता नही है. दूसरी ओर हिंदुस्तान से छिटक कर गिरा ज़मीन का एक टुकड़ा पाकिस्तान जों बस आतंक का पर्यायवाची है. यहाँ आतंक और नफ़रत की फ़सल बोई जाती है, जिसे हम हिंदुस्तानियों के…

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जनादेश या जुगाड़ु आदेश!

कर्नाटक का नाटक समाप्त हो गया. सबसे बड़ी पार्टी ने दावा किया कि जनादेश हमारे पक्ष में है और बिना नम्बरों के फुर्ती में सरकार बना ली. दो घोर विरोधी दल जो एक दूसरे का विरोध करते हुए चुनावी मैदान में उतरे थे, चुनावों का परिणाम आते ही एक हो गये. जनादेश को उन्होंने जुगाड़ू आदेश बना लिया. अब इनकी सरकार बनेगी. जनता का फ़ैसला ही कुछ ऐसा था. पर जनता भी क्या करे. कोई दूध का धुला नही है तो वोट बिखर जाते है. बहुत ख़राब और कम ख़राब…

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वाराणसी पुल दुर्घटना – हादसा या हत्या!!

ये जो वाराणसी में १८ लोग मारे गये ये सीमा पर शहीद नही हुए और ना ही ये किसी आतंकवादी की गोली का शिकार हुए है। इनका क़सूर बस इतना था कि ये अपने घरों से निकल कर बनारस की सड़कों पर आ गये थे। ये जो हादसा हुआ, इस प्रकार के हादसे हमारे देश में आए दिन होते हैं। कभी राजधानी दिल्ली में तो कभी हमारे मोदी जी के शहर में और योगी जी के राज में। इन हादसों की किसी की कोई ज़िम्मेदारी नही है। कुछ अफ़सर ससपेंड होते…

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देश माँगे छुट्टी से अवकाश!

सात दिन का सप्ताह और रविवार का अवकाश, बहुत सुखद लगता है। सभी काम करने वाले इस अवकाश का पूरे विश्व में बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा करते है। पर यदि हमारे हिंदुस्तान की बात करे तो यहाँ अवकाश सिर्फ़ रविवार तक सीमित नही है। यहाँ तो हर दूसरे दिन छुट्टी घोषित हो जाती है। कुछ भी हो बस घोषित कर दो अवकाश। आज अगर हम हिसाब लगाएँ तो पता लगेगा की अवकाश छोड़िए कार्य दिवस कितने है हमारे ये सोचें। क़रीब ४८ रविवार नैशनल हॉलिडे, धार्मिक छुट्टियाँ और जब किसी…

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First Indian Woman Opinion हिन्दी लेख 

किरण बेदी- दूषित राजनीति की शिकार

जाओ पहले घर की साफ़ सफ़ाई का ध्यान रखो! खुले में शौच जाना बंद करो! तभी राशन मिलेगा। ऐसा नही लगता कि एक माँ स्कूल से आये अपने बच्चे को आदेश दे रही हो? जूते उतार कर सही जगह रखो, हाथ मुँह धो कर आओ, तभी खाना मिलेगा। माँ समझती है कि उसे भूख लगी होगी पर वह बच्चे में अच्छी आदत डालना चाहती है। किरण बेदी जी की भी मंशा कुछ यही थी कि आदत में सुधार हो। कोई ग़लती नही थी उनकी। ऐसा आदेश वही दे सकता है…

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आज का समाज – रेप की खेप!

अख़बार का पहला पन्ना ही शर्मशार होने को काफ़ी है। सर झुक जाता है शर्म से। चारों ओर बस नकारात्मक समाचार,। उनमें भी सबसे अधिक संख्या उन समाचारों की होती है जो हम स्त्री जाति से सम्बन्धित होते है, रेप, बलात्कार। ना तो इन में धर्म का बन्धन है, ना ही जाति की कोई परवाह। और उम्र तो सात साल की बालिका हो या साठ साल की कोई स्त्री बस दो शब्द यहाँ सटीक बैठते है, नर और मादा। ये दो शब्द हाल बताने को पर्याप्त है। वो नर है…

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Opinion हिन्दी लेख 

दीक्षा के सहारे मोक्ष की इच्छा!

सूरत से निरंतर समाचार आ रहे हैं। खाते पीते, धनी परिवारों के, पढ़े लिखे युवक और युवतियाँ मोक्ष की इच्छा में दीक्षा ग्रहण कर रहें है। आज जब भौतिकवाद चरम पर है, सभी की हार्दिक अभिलाषा होती है कि उनके पास सारे आधुनिक साधन हो। ऐसे में जब ब्रैंड के कपड़े पहनना शान माना जाता है और स्मार्ट फ़ोन जीवन की लाइफ़ लाइन! ऐसे में धर्म, स्वर्ग, सन्यास और मोक्ष जैसे शब्द आश्चर्य चकित करते है। सहज ही विश्वास नही होता कि आज लोग स्वर्ग या मन की शांति के…

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