देश माँगे छुट्टी से अवकाश!
सात दिन का सप्ताह और रविवार का अवकाश, बहुत सुखद लगता है।
सभी काम करने वाले इस अवकाश का पूरे विश्व में बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा करते है।
पर यदि हमारे हिंदुस्तान की बात करे तो यहाँ अवकाश सिर्फ़ रविवार तक सीमित नही है। यहाँ तो हर दूसरे दिन छुट्टी घोषित हो जाती है।
कुछ भी हो बस घोषित कर दो अवकाश। आज अगर हम हिसाब लगाएँ तो पता लगेगा की अवकाश छोड़िए कार्य दिवस कितने है हमारे ये सोचें।
क़रीब ४८ रविवार
नैशनल हॉलिडे,
धार्मिक छुट्टियाँ और जब किसी नेता का मन करे अवकाश घोषित कर दे।
इसके अतिरिक्त कुछ छुट्टियाँ वेतन सहित भी ली जा सकती है। लगभग साल के छह महीने निकल जाते हैं इन चक्करों में। तो फिर देश में काम कैसे होगा?
हाँ, हड़ताल को तो हमने इस अवकाश की लिस्ट में शामिल ही नही किया।
जिस देश में विरोध के नाम पर संसद ठप्प हो जाती है, जहाँ जब चाहे हॉस्पिटल या स्कूल में हड़ताल हो जाती है, वहाँ इतनी छुट्टियाँ धोषित करना थोड़ा बेमानी लगता है।
यदि हम देश का वास्तव में विकास चाहते है, देश को प्रगति की राह पर ले जाना चाहते है, तो देश को इन अवकाशों से अवकाश दिलाना होगा। बस रविवार और नैशनल हॉलिडे ही घोषित हो।
यदि किसी भी धर्म वाले का कोई उत्सव है तो बस उसे ही अवकाश मिले ना की पूरा दफ़्तर बंद हो जाए। घोषित अवकाश के दिन काम पर आने वालों को अतिरिक्त तनखवाह मिले। और भी ढेर सारे उपाय सोचे जा सकते है।
आवश्यक है कि हम लोग कार्य दिवस का ध्यान रखें ना की अपनी छुट्टियों का।
देश के लिए हम ईमानदारी से कार्य करके ही हम देश को विकास की राह पर ले जा सकेंगे।
और आवश्यक है की नेतागण मुफ़्त की वाह वाहि लूटने के चक्कर में फ़ालतू के अवकाश घोषित करना बंद करें।

