आज का समाज – रेप की खेप!
अख़बार का पहला पन्ना ही शर्मशार होने को काफ़ी है। सर झुक जाता है शर्म से। चारों ओर बस नकारात्मक समाचार,। उनमें भी सबसे अधिक संख्या उन समाचारों की होती है जो हम स्त्री जाति से सम्बन्धित होते है, रेप, बलात्कार। ना तो इन में धर्म का बन्धन है, ना ही जाति की कोई परवाह। और उम्र तो सात साल की बालिका हो या साठ साल की कोई स्त्री बस दो शब्द यहाँ सटीक बैठते है, नर और मादा। ये दो शब्द हाल बताने को पर्याप्त है। वो नर है…
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