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आज का समाज – रेप की खेप!

अख़बार का पहला पन्ना ही शर्मशार होने को काफ़ी है। सर झुक जाता है शर्म से। चारों ओर बस नकारात्मक समाचार,। उनमें भी सबसे अधिक संख्या उन समाचारों की होती है जो हम स्त्री जाति से सम्बन्धित होते है, रेप, बलात्कार। ना तो इन में धर्म का बन्धन है, ना ही जाति की कोई परवाह। और उम्र तो सात साल की बालिका हो या साठ साल की कोई स्त्री बस दो शब्द यहाँ सटीक बैठते है, नर और मादा। ये दो शब्द हाल बताने को पर्याप्त है। वो नर है…

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उपवास या फिर उपहास

एक दिन एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के महान नेता गण एक दिन के उपवास का प्रण लेते है। ज़ोर शोर  से राजघाट पर बापू की समाधि के समीप आयोजन होता है। नेता गण भी अपने स्तर पर तैयारी करते है। सुबह सुबह छोले भटूरे के साथ मीठी लस्सी डकार कर ख़ुद को उपवास के लिए भूखा रहने की तैयारी करते है।  इसके अगले ही दिन इनकी घोर विरोधी सत्ताधारी पार्टी इनसे एक क़दम आगे निकलते हुए, देश में अलग अलग स्थानो पर उपवास करने की घोषणा करते है अब इन्हें भी तो भूखा रहना है…

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