हड़ताल की जाँच पड़ताल
हमारे शहर के सफ़ाई कर्मचारी कई दिनों से हड़ताल पर है.
शहर की साफ़ सफ़ाई पहले भी बहुत अच्छी नही थी पर अब तो हालात बदतर हो गये है.
हड़ताली कर्मचारियों की अपनी यूनियन है तो बाहर वालों को बुला कर भी सफ़ाई नही करवा सकते.
थोड़ा प्रयास किया गया था पर बाहर वालों को काम नही करने दिया गया.
अपने देश में हड़ताल का अभिप्राय यही है “काम रोको”!
स्कूल या कॉलेज में हड़ताल होती है तो छात्र सड़कों पर उतर आते है.
तोड़ फोड़, सरकारी सम्पत्ति के साथ निजी वाहनों तक को नुक़सान पहुँचाया जाता है.
शिक्षक यदि हड़ताल पर होते है तो पढ़ाना छोड़ धरने पर बैठ जाते है.
डॉक्टर मरीज़ों को मरता छोड़ हाय-हाय के नारे लगाने लगते है.
किसी भी संस्थान में हड़ताल हो या कोई असंतोष पहला क़दम होता है काम रोको.
क्या पूरे विश्व में हड़ताल का बस यही तरीक़ा है या किसी और तरीक़े से भी, शांतिपूर्ण ढंग से विरोध जताया जा सकता है?
थोड़ी सी जाँच पड़ताल करने पर ज्ञात हुआ कि इस तरह सरकारी और निजी संपतियो को नुक़सान पहुँचाना, सड़कों पर उतर रास्ते जाम करना या फिर रेल रोक लेना बस हमारे देश में ही होता है.
अन्य सभ्य देश के लोग अपने हाथ या मुँह पर काली पट्टी बाँध कर विरोध जताते है.
एक जूता फ़ैक्टरी में तो बहुत अजीब तरीक़ा अपनाया गया.
वहाँ विरोध स्वरूप काम करने वालों ने सारे दिन बस एक ही पैर के जूते बना दिए.
अगले दिन जब आपसी सहमति हुई तो दूसरे पैर के जूते बने.
पर उत्पादन नही रुका.
अभी जापान में भी एक नए अन्दाज़ में हड़ताल की गई.
परिवहन कम्पनी के कर्मचारी और प्र्ब्न्धको में कुछ विरोध था.
विरोध स्वरूप परिवहन चालकों को हड़ताल पर जाना था.
अगले दिन डिपो से सभी बसें निर्धारित मार्गों के लिए निकली और पूरे दिन समय से चली.
आम जनता को किसी प्रकार की कोई असुविधा नही हुई.
शाम को जब बसे वापस डिपो आइ तो प्रबंधको ने देखा उस दिन बस में कोई टिकट नही कटी.
सबको मुफ़्त में सवारी करवाई गई.
मालिकों को अच्छा सबक़ मिला.
आम जनता ख़ुश.
हम भारतवासी नक़ल करने में माहिर है.
फिर अच्छी बातों की नक़ल क्यूँ नही करते.
क्या हम हड़ताल के नाम पर अव्यवस्था फैलाते है, देश का नुक़सान करते है.
कितना अच्छा हो अगर शिक्षक हड़ताल के नाम पर छात्रों की फ़ीस जमा हुए बिना है रसीद काट दें.
डॉक्टर उस दिन मरीज़ों का मुफ़्त में इलाज करते जाये.
कर्मचारी काम ना रोके पर पूरा भी ना करे ताकि माँगे पूरी होने पर उसे पूरा कर सके.
और भी कई सकारात्मक पहल हो सकती है.
बात बस देश हित में सोचने की है.

