First Indian Woman Opinion हिन्दी लेख 

किरण बेदी- दूषित राजनीति की शिकार

जाओ पहले घर की साफ़ सफ़ाई का ध्यान रखो! खुले में शौच जाना बंद करो! तभी राशन मिलेगा। ऐसा नही लगता कि एक माँ स्कूल से आये अपने बच्चे को आदेश दे रही हो? जूते उतार कर सही जगह रखो, हाथ मुँह धो कर आओ, तभी खाना मिलेगा। माँ समझती है कि उसे भूख लगी होगी पर वह बच्चे में अच्छी आदत डालना चाहती है। किरण बेदी जी की भी मंशा कुछ यही थी कि आदत में सुधार हो। कोई ग़लती नही थी उनकी। ऐसा आदेश वही दे सकता है…

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उपवास या फिर उपहास

एक दिन एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के महान नेता गण एक दिन के उपवास का प्रण लेते है। ज़ोर शोर  से राजघाट पर बापू की समाधि के समीप आयोजन होता है। नेता गण भी अपने स्तर पर तैयारी करते है। सुबह सुबह छोले भटूरे के साथ मीठी लस्सी डकार कर ख़ुद को उपवास के लिए भूखा रहने की तैयारी करते है।  इसके अगले ही दिन इनकी घोर विरोधी सत्ताधारी पार्टी इनसे एक क़दम आगे निकलते हुए, देश में अलग अलग स्थानो पर उपवास करने की घोषणा करते है अब इन्हें भी तो भूखा रहना है…

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दीनदयाल जी की “political diary” ही काफी है राजनीतिक सुधार के लिए

दीनदयाल उपाध्याय एक भारतीय विचारक, अर्थशाष्त्री, समाजशाष्त्री, इतिहासकार और निर्भीक पत्रकार थे. भारतीय राष्ट्रवाद के धवजवाहक के रूप में खुद को स्थापित किया. भारतीय जनसंघ की स्थापना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा वर्ष 1951 में किया गया एवं दीनदयाल उपाध्याय को प्रथम महासचिव नियुक्त किया गया. वे लगातार दिसंबर 1967 तक जनसंघ के महासचिव बने रहे. उनकी कार्यक्षमता, खुफिया गतिधियों और परिपूर्णता के गुणों से प्रभावित होकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उनके लिए गर्व से सम्मानपूर्वक कहते थे कि- ‘यदि मेरे पास दो दीनदयाल हों, तो मैं भारत का राजनीतिक…

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