कविता शायरी 

होली

ओरी होरी! भेज संदेशा, बोल पिया को जल्दी आयें। तेरा नीला-पीला रंग क्या मोहेगा, मोहे तो पिया का रंग ही भाये। पिया का रंग गहरा है इतना, छोड़-छुड़ावै ना छूटेगा। तेरा गहरा रंग भी ढल जाएगा, पिया के आगे कुछ न टिकेगा। जो रंग दे तू मेरे अंग को रंग में, धो दूंगी जल से पल में। पर पिया के रंग को कैसे धोदूँ, जो रचा हुआ है अंतर्मन में। ओरी होली! आजा रंग दे, थोड़ा अपने रंग में रंग ले। देख पिया जिससे जल जायें, भागे-भागे घर को आयें।…

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कविता शायरी 

खुद को तू पहचान ले मानव

जा रहा है तू किस दिशा में मानव, उस पथ की तू जाँच तो करले। आगे बढ़ने से पहले मानव, खुद की तू पहचान तो करले। देख रहा है जो तू मानव, अंधकार की सीढ़ी है वो। एक बार खुद में तू झाँक ले, चमत्कार तुझमें ही है वो। जान ले मानव एक सत्य तू, परम शक्ति का है तत्व तू। भटक रहा है यहाँ-वहाँ क्यों, समझ ले पहले स्वंय की गुत्थी तू। चेतन, अर्धचेतन और अचेतन, तीन तरह से बटाँ हुआ मन। अगर तुझे है जो भी पाना, इसी…

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Bollywood Entertainment कविता शायरी 

गुलजार की 10 बेहतरीन कविताएं और गीत

शब्दों के जादूगर सम्पूर्ण सिंह कालरा उर्फ गुलजार किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। साहित्य, समाज और कला में रुचि रखने वाला हर व्यक्ति उन्हे बखूबी जनता है। पेश है उनकी 10 सबसे बेहतरीन कविताएं/शायरियाँ: 1. मोरा गोरा अंग लइ ले मोहे शाम रंग दइ दे छुप जाऊँगी रात ही में मोहे पी का संग दइ दे 2. थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है ज़िंदगी फिर भी अहा ख़ूबसूरत है थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है ज़रूरत है… 3.तेरे बिना ज़िंदगी से कोई, शिकवा, तो नहीं, शिकवा नहीं शिकवा नहीं,…

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कविता शायरी 

बनना है तो हवा बनो

बनना है तो हवा बनो, बस यहाँ-वहाँ तुम मस्त बहो। इस रंग बदलती दुनिया में, तुम रंगहीन मानव बनो। थाम सके ना कोई तुमको, ऐसी तुम रफ्तार धरो। काँप उठे हर जर्रा दुश्मन का, तेज़ प्रचंड तूफान बनो। पल-पल तपते क्रोधी मानव, शीतल वायु का वेग धरो। सरल-सुगम सब हो जाएगा, व्यर्थ भावना को तो तजो। त्याग के सारी दुनिया-दारी, मंद पवन की सुगन्ध बनो। भीने-भीने इस प्रवाह में मानव, खुद की तुम पहचान करो। Sonam Kharwar

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कविता शायरी 

अत्याचारी मानव

धरती भी एक दिन बोल पड़ेगी, अत्याचारी मानव की पोल खुलेगी। अनन्त काल की गाथा है ये, कब तक सारे दर्द सहेगी।   काँप उठेगा जग ये सारा, जब वो अपने दर्द कहेगी। अश्रुओं की लम्बी धार बहेगी, घायल पृथ्वी इज़हार करेगी।   जाने वो कैसा आलम होगा, जब धरती-मानव की बात छिड़ेगी, गलतियों की लंबी लिस्ट बनेगी, धरती जुर्माना चार्ज करेगी।   बोझ तले एहसानों के दबके, स्वार्थ भावना खंडित होगी। जब युद्ध में परास्त मानव होगा, तभी तो उसकी आँख खुलेगी। Sonam Kharwar

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तेरी-मेरी दोस्ती

छोटा सा एक बच्चा था, मासूम बहुत ही लगता था। माँ का था वो राज-दुलारा, शर्मिला सा बहुत ही प्यारा। एक खेल खुदा ने ऐसा रचाया, गरिमा से कैम्प में तुझे मिलाया। हुस्न ने उसके तुझे हराया, ना जाने कैसा जादू चलाया। हर अदा पे उसकी तू मरता था, पर कहने से तू डरता था। प्यार वो तेरा पहला था, एहसास ही कुछ अलबेला था। प्यार बना तेरा खुंखार, जान की बाजी लगी कई बार। डर गई गरिमा, अब हो क्या? टब गयी बात सरगम के पास। फिर शुरू हुई…

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15 Beautiful Lines Mirza Ghalib That Beholds Love in a Better Way

Love is the most amazing part of our life, without love I think life is impossible. If we are talking about love then one name is always pop up in our mind, the legendary writer who creates magic with his words and verses called Mirza Asadullah Baig Khan, known to the world his pen name, Ghalib Whenever you read his verses or poetries, you just find another world, the world of imagination, the world of happiness. His words are having an in-depth pain. Mirza Ghalib was born in Agra…

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Entertainment Featured Article कविता 

10  Inspirational Quotes By Rabindranath Tagore that still inspire us to shape a better future

The great philosopher and artist, Rabindranath Tagore. The legend with all the qualities in one, whether its poems, drama or music, he was master in all. His name was written as Rabindranath Thakur in Indian language. His major works included Gitanjali (Song Offerings), a world-famous poetry book; Gora (Fair-Faced); Ghare-Baire (The Home and the World); and many other works of literature and art. He had contributed a lot for writing in history. People still admire his works and still his poetries inspire a lot of people.Sometime emotions converted into words and I think that’s what Rabindranath Tagore’s words…

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समय

ऐ समय! तू ही बता, तुझे दोस्त मानूँ या बला। तेरे संग में चलना ही भला, तेरे रंग में रंगना है कला। गुरु मान तुझको पूजता हूँ, समय की परीक्षा जीतता हूँ। जब काम हो ना कोई भला, तब मान लूँ तुझको बला। चल चलें कुछ कर दिखायें, उन लोगों को कुछ तो सिखायें। बेठें हैं जो यूँ ही खाली, क्यों वो अपना समय गवांयें। समय की देख महत्वता को, बाजी कोई खेल जाएं। बजा दे डंका जीत का, और वक़्त से कदम मिलायें। करलें समय को मुठ्ठी में, की…

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कविता शायरी 

ना बदल सका तू सोच को मानव

बदल रहा है तू सब कुछ मानव, ना बदल सका तू सोच को अपनी। आधुनिकता के युग में भी, तू बात करे है जाति-धर्म की।   इस विकसित होती दुनिया में, मान लूं कैसे विकसित तुझको। जहां रंग-भेद की शान है, और कला रंग बदनाम है।   इस क्षण-क्षण बढते पल में मानव, ढांचा ही बदल दिया है तूने। अफ़सोस है कि ना बदल सका तू, दहेज प्रथा का अभद्र सौदा।   बदलाव की तेरी सीढ़ी में, गांव का कोना कोना रौशन। पर रौशन हुआ ना सपना उसका, जो सोच…

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