भारत के विदेश मंत्री के पद पर बैठे विदेशी मामलों के जानकार एस जयशंकर
30 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। नरेंद्र मोदी के साथ उनके कैबिनेट के 57 मंत्रियों ने भी अपने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इन 57 मंत्रियों में से 24 केंद्रीय कैबिनेट के मंत्री थे। जबकि अन्य मंत्री राज्य मंत्री की श्रेणी वाले थे। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिमंडल कुछ अलग तरह की नजर आई। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को जहां गृहमंत्री का भार सौंपा गया तो वहीं वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण नजर आएंगी। विदेश मंत्रालय का भार काफी समय से भारत के विदेश दूत के रूप में काम कर रहे एस जयशंकर को सौंपा गया है। इस तरह भारत के नए विदेश मंत्री एस जयशंकर बन गए हैं। एस जयशंकर पर जितना भरोसा यूपीए की सरकार के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जताया था वही भरोसा एक बार फिर से नरेंद्र मोदी ने उन पर दिखाया।
विदेशी मामलों के जानकार हैं नए वित्त मंत्री
एस जयशंकर वही व्यक्ति हैं जिन्होंने पिछले चार दशकों में भारत के विदेश सचिव के रूप में अपना कार्यभार संभाला है। मार्च 2019 में उन्हें राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने उनके इतने लंबे समय तक विदेश सचिव के रूप में बने रहने के कारण पद्मश्री से सम्मानित किया था। एस जयशंकर को विदेशी मामलों का बहुत गहरा अनुभव है क्योंकि उन्होंने भारत की तरफ से भारत के लिए कई देशों में विदेश सचिव के रूप में कार्यभार संभाला है। जब भारत और चीन के मध्य डोकलाम विवाद की स्थिति पैदा हुई थी तो जयशंकर ने बीजिंग में भारत की तरफ से कमान संभाली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों और उनकी विदेशनीति में बहुत अहम योगदान था।
अचानक दिया गया यह पद
जयशंकर अब अपने कार्य से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में अचानक ही उन्हें शपथ ग्रहण के लिए फोन गया। जिसके बाद वह शपथ के लिए गए। जहां पर उन्हें विदेश मंत्री का पद दिया गया। सुषमा स्वराज के कैबिनेट में शामिल न किए जाने की रिपोर्ट करने के लिए एस जयशंकर जैसे विदेशी मामलों के जानकार को विदेश मंत्रालय दिया गया। अब वित्त मंत्री एस जयशंकर देश के विदेशी मामलों को संभालेंगे।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



