उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के कारण सुप्रीम कोर्ट ने थमाया नोटिस
यूपी में सीएए और एनआरसी के विरोध में कुछ हफ्ते पहले भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। जब सड़क पर उतरे हुए लोगों ने भारी मात्रा में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले इन लोगों ने पुलिस पर पथराव भी किया था। साथ में कई बसों को जला दिया था और जिस कारण पुलिस को इन पर गोली चलानी पड़ी थी। बाद में पुलिस ने इनकी फोटो को सार्वजनिक कर इनके पते पर हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए नोटिस भेजा था। शुक्रवार को देश की उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से इसी मामले में जवाब मांगा है और 4 हफ्ते का समय जवाब देने के लिए योगी सरकार को दिया गया है। लोगों द्वारा नुकसान की भरपाई करने के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
उत्तर प्रदेश सरकार को दिया गया 4 हफ्ते का समय

उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम जोसेफ बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए यूपी सरकार को 4 हफ्ते का समय दिया। दरअसल एक वकील द्वारा दायर याचिका में यह बताया गया था कि यूपी सरकार ऐसे लोगों को भी नोटिस भेजा है। जिनकी उम्र 90 वर्ष से अधिक है और उनके खिलाफ हिंसा या किसी भी प्रकार की घटना के लिए कोई प्राथमिकी नहीं दर्ज की गई है। इसके अलावा एक 94 वर्ष के ऐसे व्यक्ति को नोटिस भेजा गया है। जिसकी 6 वर्ष पहले ही मृत्यु हो चुकी है।
विरोध प्रदर्शन के कारण हुआ था भारी नुकसान
नागरिकता संशोधन कानून के कारण उत्तर प्रदेश में हुए विरोध प्रदर्शनों में काफी नुकसान हुआ था। जिस कारण पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी थी, इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार 925 लोगों को आसानी से जमानत नहीं मिलेगी। इनको इनके द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई करने के बाद ही सशर्त जमानत दी जाएगी। याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा इस तरह के कदम उठाया जाते हैं तो यह एक राजनीतिक बदले वाला कदम भी हो सकता है।
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