पराली जलाने को लेकर स्थानीय प्रशासन हुआ सख्त, कृषि अधिकारियों की लगाई ड्यूटी, पढ़िये पूरी खबर
पराली और धान के अवशेष जलाने को लेकर स्थानीय प्रशासन भी अब सख्त हो गया है। एसडीएम ने ऐसे किसानों की लिस्ट बनाकर नजर रखने का फैसला लिया है। कृषि अधिकारियों के साथ-साथ दूसरे अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई है। इसके लिए एसडीएम शाहाबाद ने शुक्रवार के दिन अपने कार्यालय में अधिकारियों की एक बैठक ली। उन्होंने बैठक में कहा कि किसानों को धान की कटाई के बाद अवशेष व पराली को आग न लगाने बारे जागरूक किया जाएं। उपमंडल के हर गांव में सरपंच के सहयोग से मुनादी कराई जाएगी। एसडीएम ने कहा कि धान के अवशेषों को आग लगाने से पर्यावरण काफी प्रदूषित होता है और पर्यावरण में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ता है।

वायु प्रदूषण से हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है प्रभाव
डाक्टरों के अनुसार यह कहा गया है कि वायु प्रदूषण से सांस व फेफड़ों से संबंधित बीमारी आती हैं। इसके साथ सामान्य स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि आग लगाने से प्रदूषण के छोटे-छोटे कणों से हवा में आने से पीएम 2.5 का स्तर बढ़ जाता है। इससे लोगो को सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ होती हैं। अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं। धान के अवशेष जलाने से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

फसल अवशेष जलाने पर हो सकती है जेल और जुर्माना
एसडीएम शाहाबाद ने कहा कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसको लेकर गंभीर है। किसानों को लगातार इसके लिये जागरूक किया जा रहा है। इसके बाद भी पराली और धान के अवशेष जलाए जाते हैं तो आरोपित के खिलाफ कानून कार्रवाई की जाएगी। उसको छह महीने की जेल और 15 हजार रुपये तक का जुर्माना या फिर दोनों भुगतना पड़ना सकता है।

