आमजन का पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयास??
पर्यावरण की सबसे बुनियादी परिभाषा है कि हमारे चारों ओर का आवरण ही, है पर्यावरण। यानि हमारे आस-पास हम जो भी पेड़-पौधे, पशु, जीव-जन्तु, नदी, पहाड़, पठार, तालाब, मनुष्य जो कुछ भी है वही पर्यावरण हैं। साथ ही हमारा पर्यावरण स्वस्थ, स्वच्छ एवं सदुपयोगी हो यही सबकी इच्छा है, यह भी गौर करने लायक तथ्य है कि पर्यावरण हमारी अपरिहार्य आवश्यकता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयास के लिए हम सभी को एकजुट होकर काम करने होगें!!
क्या है पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयास के उपाय??
पर्यावरण संरक्षण चूँकि हम सभी की जिम्मेवारी भी हैं साथ ही हम कहीं न कहीं चाहते भी हैं। एक बात समझिए कि हम छोटे होते हैं तो सबसे पहले हमे दाँत नाखून बाल साफ करना सिखाया जाता है। फिर परिवेश की सफाई सिखायी जाती है, और अब जब वर्तमान परिस्थितियों में वैश्विक पर्यावरण की बात आयी हैं। तो हम सिक्के का पहलू बदल कर देखते हैं, कि बदलते दौर में हमें पेड़ लगाने चाहिए। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयास ये बात ऐसी है कि जिसे रामवती काकी से लेकर राज सिंहानिया तक जानते हैं। हम सभी को पेड़ लगाने चाहिए और न केवल औपचारिक खानापूर्ति के लिए लगाने चाहिए, अपितु उनका संरक्षण जिससे पर्यावरण संरक्षण भी हो ऐसा करने की नैतिक जिम्मेवारी भी लेनी चाहिए।
प्रश्न है पेड़ लगाएँगे कहाँ?
ये इस सदी का सबसे भयावह और आतंकित करता प्रश्न हैं पर्यावरण संरक्षण होगा तो कैसे होगा? पेड़ लगाएँगें कहा हम? आखिर कौन सा भवन और कौन सी इमारत को जंगल में बदलने का प्रयास कर सकते हैं हम!! फ़कत 150वर्ग फुट के मकान में 4 गमले काफी हैं?
यही एक सच्चाई बारहवीं कक्षा की जीव विज्ञान की पुस्तक में अचंभित कर देती है, “शैवाल” ALGAE पृथ्वी की कुल उत्पादित ऑक्सीजन का 90% भाग उत्पन्न करते हैं, जिनका रखरखाव बेहद आसान है परन्तु “शैवाल” की कुछ विशिष्ट प्रजातियाँ ही लाभदायक हैं, जंगलों, आच्छादित वनों या वृक्षों का अपना महत्व है पर शैवाल का अपना। कुलजमा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयास हम सभी को करने होगें!!
निष्कर्ष –
इस समस्या पर विचार करने से अधिक आवश्यकता आज हमें समाधान पर विचार करने की है। पर्यावरण संरक्षण की दशा एवं दिशा क्या होगी यह एक महत्वपूर्ण विमर्श हैं। पर्यावरण संरक्षण महज मेधा पाटकर, सुंदर लाल बहुगणा या अमृता देवी विश्नोई की ही जिम्मेदारी नहीं थी या है। यह आमजन को सीधे प्रभावित करने वाला मुद्दा है। अगर आज इस पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयास पर विचार नहीं किया गया तो आने वाली पीड़ियों को हम क्या विरासत सौपेगें!! इस बात को साफगोई से समझिए कि पर्यावरण संरक्षण का यह विमर्श ये पर्यावरण दिवस केवल शुभकामनाएं प्रेषण दिवस बन कर ना रह जाए।
हाँ हम समाधान तब ही खोज पाएंगे जब देश के तथाकथित स्वनिर्मित समस्याओं से आगे कुछ और सोचेंगे!!
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