हिमाचल प्रदेश के इस मंदिर में नहीं टिकती है कोई छत
देश और दुनिया में कई ऐसे रहस्य हैं जिनका पता लगाने में आज भी विज्ञान नाकाम रहा है। ऐसे रहस्यों का पता हमें वेद और पुराणों में मिला करता है। भारत देश सनातन धर्म का देश रहा है। भारत देश में हमारे धर्म ग्रंथों से जुड़ी अनेक कहानियां हैं जो कि आज भी सच होती नजर आती हैं। इन कहानियों के रहस्यों का पता विज्ञान आज तक नहीं लगा पाया है। मगर इनकी सच्चाई हमारे धर्म ग्रंथों में बहुत पहले ही बता दी गई थी। आज हम आपको ऐसे ही एक रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं। दरअसल हिमाचल प्रदेश के शिकारी देवी मंदिर में सदियों से कोई भी छत नहीं है। इसके पीछे एक बहुत ही बड़ा पौराणिक कारण है। हिमाचल प्रदेश का शिकारी देवी मंदिर 11000 फुट की ऊंचाई पर करसोग जंजैहली घाटी पर स्थित है।
हजारों वर्षों से मंदिर के ऊपर नहीं है कोई छत
दरअसल हिमाचल प्रदेश के शिकारी देवी मंदिर में मान्यता है कि इस मंदिर के ऊपर आज तक कोई भी छत नहीं टिक पाई है। कई बार मंदिर के ऊपर छत बनाने का प्रयास किया गया मगर मंदिर पर छत बनाने के सभी प्रयास नाकाम साबित हुए। देवदार वृक्षों के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं से भरा रहता है। गर्मी के मौसम में इस मंदिर में काफी ज्यादा संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जबकि ठंडियों में सर्दी अधिक पड़ने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या कम पड़ जाती है। इस मंदिर के चारों तरफ प्राकृतिक खूबसूरती श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है।
पांडवों ने करवाया था इस मंदिर का निर्माण
कहां जाता है कि अज्ञातवास के दौरान जब पांडव यहां पर शिकार खेलते हुए पहुंचे थे तो यहां पर उन्हें शिकारी देवी माता ने दर्शन दिए थे। वापस आते समय उन्होंने यहां पर एक मंदिर का निर्माण कर दिया था। शिकारी देवी माता ने पांडवों को कौरवों पर विजय का आशीर्वाद भी दिया था। सर्दी के समय में जब यहां पर बर्फ गिरती है तो बर्फ माता की मूर्ति के ऊपर नहीं टिकती बल्कि पिघल जाती है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



