जाने उन भारतीयों के बारे में जिन्हें नहीं है वोट डालने का अधिकार
वोट डालना हर भारतीय का अधिकार होता है। ऐसा चुनावों के दौरान बड़े-बड़े नेताओं और हमारे देश के चुनाव आयोग का कहना है। जब चुनाव आता है, तब वोट डालने को लेकर कई तरह के प्रचार किए जाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों द्वारा लोगों को जागरूक किया जाता है और यह बताया जाता है कि वोट डालने से हम अपने अनुरूप बदलाव ला सकते हैं और जनता के हित में काम करने वाली सरकारों को चुन सकते हैं। मगर आज हम आपको उन भारतीय लोगों के बारे में बताएंगे जिन को वोट डालने का अधिकार ही नहीं है।
असम मेघालय सीमा पर स्थित लोंगुरी गांव में 150 गारो आदिवासियों को चुनाव आयोग द्वारा भुला दिया गया है। इन गारो आदिवासियों के पूर्वज 1940 से यहां आकर बस गए थे और आजादी के बाद इनका नाम वोट डालने वाली सूची में नाम अंकित होना था। मगर आज तक इनका नाम वोट डालने वाली सूची में नहीं आ पाया है। गुवाहाटी से 50 किलोमीटर दूर पश्चिम में स्थित यह गांव असम और मेघालय के बीच विवाद की वजह बना हुआ है। जिसके कारण इस गांव के 150 गारो आदिवासी वोट डालने के अधिकार से वंचित हैं।
गांव के मुखिया आर्बिट्सन मोमिन ने बताया कि हमने गांव के गारो आदिवासियों को वोट डालने के अधिकार को दिलाने के लिए गुवाहाटी लोकसभा क्षेत्र के बोको विधानसभा क्षेत्र के अधिकारियों से बात की थी। जिस पर जिले के पुलिस उपायुक्त कमल कुमार वैश्य ने बताया कि ऐसा जरूर होगा लेकिन इस चुनाव से पहले इन आदिवासियों का नाम सूची में लाना संभव नहीं है।
एक तरफ जहां वोट डालने को लेकर पूरे देश में कैंपेन चला जाता है, करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ सब कुछ जानने के बाद भी गांव के 150 गारो आदिवासियों का चुनाव आयोग द्वारा नजर अंदाज किया जाना बेहद दुखद और आश्चर्यचकित कर देने वाला है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



