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बोडो अकॉर्ड 2020 साइन कर केंद्र सरकार ने रचा इतिहास

बोडो अकॉर्ड 2020 : केंद्र सरकार ने 2 जनवरी, 2020 को असम में खतरनाक उग्रवादी समूहों में से एक नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। बोडो राज्य की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) ने भी इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

समझौता एक अलग बोडोलैंड राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की मांग के बिना जनजातीय क्षेत्रों को राजनीतिक और आर्थिक लाभ प्रदान करता है। त्रिपक्षीय समझौते पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, एनडीएफबी के चार धड़ों के नेतृत्व, एबीएसयू के संयुक्त सचिव, सत्येंद्र गर्ग, गृह मंत्रालय और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण ने हस्ताक्षर किए हैं।

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बोडो अकॉर्ड 2020: बोडो समझौते की मुख्य विशेषताएं

गृह मामलों के मंत्री, अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो के प्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने कहा कि यह समझौता असम के लोगों के साथ-साथ बोडो जनजाति के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करेगा।  उन्होंने यह भी कहा कि 1,550 बोडो सदस्य 30 जनवरी 2020 को 130 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करेंगे। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों को सुनिश्चित किया कि सभी वादे समयबद्ध तरीके से पूरे होंगे।

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इस समझौते के बाद बोडो जनजातियों को राजनीतिक और आर्थिक लाभ मिलेगा। समझौता समुदाय को कुछ राजनीतिक अधिकार और कुछ आर्थिक पैकेज प्रदान करेगा।  राजनीतिक पंडितों के अनुसार, समझौते से बोडो भाषा, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय मामलों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) का गठन शिक्षा, बागवानी और वनों जैसे बोडो जनजातियों के मुद्दों की देखभाल के लिए किया गया था। हालांकि, असम सरकार द्वारा पुलिस, सामान्य प्रशासन और राजस्व नियंत्रित किया जाता है। बीटीसी की स्थापना भारतीय संविधान की 6 वीं अनुसूची के तहत की गई थी।  भारत सरकार ने बोडो जनजाति को न्याय देकर देश का भला किया है और इतिहास रच दिया है।

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