एक साल और गुजर गया है इंतजार में, राखी के त्यौहार में
एक साल और गुजर गया है इंतजार में
एक साल और गुजर गया है इंतजार में,
मगर याद रखना, आज भी कोई कमी नहीं है तेरे भाई के प्यार में…
मुझे मालूम है कि तुम आज मुझसे कितनी नाराज हो…
मुझे मालूम है कि आज तुम भी नये कपड़े पहनी होगी,
परी की तरह लग रही होगी..
लेकिन आज तुम चहक नहीं रही होगी…
आज राखी का त्यौहार है, घर में चहलकदमी होगी
“मामा” आये होंगे घर पर
“पापा” बुआ के घर गये होंगे
बुढ़िया बुआ भी दादा जी से मिलने आयी होंगी,
साथ में आम का चूरन भी लायी होंगी
आज “मम्मी” को भी उपहार मिलेगा
और बुआ को भी…
उनको अपने अपने भाइयों का प्यार मिलेगा…
मम्मी “खीर” बनाकर मामा को खिला रही होगी…
बहन! मुझे ये सब आभास हो रहा है..
मुझे याद आ रहा है कि तुम मुझे बड़े भैया से एक मिठाई ज्यादा खिलाती थी
और हाँ …
मैं “राखी” भी अपने पसंद से चुनता था
“घी” और कुमकुम का तिलक भी याद आ रहा है…
तू मुझसे तीन साल छोटी है,
सबसे ज्यादा स्नेह भी मुझसे ही है..
तुमको शायद मालूम ना हो, जो तुमको आज के दिन पैसे मिलते थे वो मै तुम्हे बहलाकर ले लेता था
बहन मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम रो रही होगी…
और शायद मै भी…
बहन मै रो रहा हूँ,
चाँद-तारों को खो रहा हूँ…
“व्यस्त जीवन” ने लगातार छठी बार मेरी कलाई सुनी कर दी है
मैंने बार-बार अपने आप को अधूरा महसूस किया है…
काश इसबार तुम मुझे राखी बांध देती,
कुछ देर के लिए मुझे चाँद मान लेती
मेरी आरती करती…
मै अगले साल जरूर आऊंगा
तुम्हारे लिए उपहार भी लाऊंगा
मुझे तुम तिलक भी लगाना,
भैया से एक ज्यादा मिठाई खिलाना
बस इस सावन फिर से पतझड़ भर लो
और मै भी…

Author, Writer, Poet


Awsme lines????
Bahut khub शानदार!
Nice guru
Nice lines…