धैर्य और साहस से निश्चित मिलेगी सफलता
गुलजार साहब ने लिखा है, “सोचता था दर्द की दौलत से एक मैं ही मालामाल हूं देखा जो ग़ौर से तो हर कोई रईस निकला।” इन चंद लाइनों के हर एक शब्द अपने आप में बहुत बड़ी बात कह रहे हैं। मनुष्य किसी ना किसी परेशानी का शिकार अवश्य होता है। वह परेशानी घर से जुड़ी हो सकती है, ऑफिस से या हमारे स्वास्थ्य से किसी ना किसी तरह की परेशानी से ग्रसित होने के कारण उसे यही लगता है कि मुझसे ज्यादा पीड़ित संसार में कोई भी नहीं है। लेकिन उन्हीं में से कुछ मनुष्य जो उस परेशानी के समय में धैर्य और साहस का साथ पकड़कर लगातार अपने प्रयास की ओर तत्पर रहते हैं। वो निश्चित तौर पर सफलता की ऊंचाइयों को पाने से चूक नहीं सकते हैं।
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हर एक सफल कहानी के बीच से धैर्य और साहस का महत्व उतना ही अधिक होता है जितना कि किसी प्यासे के समक्ष पानी का। यदि हम महाभारत में पांचो पांडव की स्थिति की बात करें तो अपना सब कुछ खो जाने के बाद यदि उन्होंने इस मंत्र का हाथ नहीं था ना होता तो शायद दुर्योधन जीत जाता और अच्छाई पर बुराई की जीत होती।
परंतु भगवान श्री कृष्ण के मार्गदर्शन में पांडवों ने धैर्य और साहस का साथ नहीं छोड़ा और अंततः सफलता पाई। ठीक उसी प्रकार जीवन हर पल हर व्यक्ति की परीक्षा लेता है। वह परीक्षा कभी बहुत बड़ी और कठिन हो सकती है या फिर छोटी और आसान भी। उस समय धीरज और पराक्रम का साथ पकड़ कर उसका डटकर सामना करने में ही भलाई है। यदि मनुष्य परेशानियों से ना घबरा कर अपनी सफलता के मार्ग पर लगातार अग्रसर रहे तो निश्चित ही सफलता उसके कदम चूमेगी। इसलिए सफल व्यक्तियों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में भी परेशानियों को इतना महत्व ना दें की सफलता आपसे कोसों दूर चली जाए।

