मायावती ने अखिलेश यादव को झटका देते हुए जौनपुर से उतार अपना प्रत्याशी
राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता है। यह बात अक्सर प्रमाणित होती रहती है। लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करने के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने गठबंधन किया है। मगर इस गठबंधन में फूट पड़ती हुई दिखाई पड़ रही है क्योंकि मायावती ने एक ऐसा फैसला ले लिया है जो कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को काफी परेशानी में डाल सकता है। दोनों के बीच लोकसभा चुनाव में जौनपुर की सीट को लेकर असमंजस था। अखिलेश यादव यहां से अपने चचेरे भाई तेजप्रताप यादव को प्रत्याशी बनाना चाहते थे। मगर इसके विपरीत फैसला लेते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने यहां से श्याम सिंह को प्रत्याशी बना कर समाजवादी पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है।
रविवार को मायावती ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने 16 प्रत्याशियों की घोषणा की। जिसमें उन्होंने अपनी सहयोगी पार्टी सपा को सबसे बड़ा झटका देते हुए जौनपुर से पूर्व विशेष अधिकारी श्याम सिंह यादव को लोकसभा चुनाव का टिकट देकर अखिलेश यादव को मुश्किल में डाल दिया है। श्याम सिंह यादव रानी पट्टी जौनपुर के रहने वाले हैं। अखिलेश यादव यहां से अपने चचेरे भाई तेजप्रताप सिंह यादव जोकि इस समय मैनपुरी से सांसद हैं को चुनाव लड़ना चाहते थे क्योंकि इस बार मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव को टिकट दिया गया है। मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से प्रत्याशी बनाए जाने के कारण तेज प्रताप नाराज भी थे और उनके समर्थकों ने इसका विरोध भी किया था। जौनपुर की सीट के बदले समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी को बलिया की सीट देने को तैयार थी। मगर जौनपुर में अपना प्रत्याशी उतारने के बाद तेरे प्रताप यादव के लिए समाजवादी पार्टी के पास कोई सुरक्षित सीट नहीं बची है।
मायावती ने जिन 16 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है उसमें मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी का भी नाम है। कभी समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव ने अंसारी बंधुओं को उनकी गुंडागर्दी के कारण पार्टी में लेने से मना कर दिया था।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



