कल पड़ रही कालभैरव अष्टमी, धूम धाम से मनाया जाएगा पर्व, पढ़िये खबरFeatured Article Knowledge News 

कल पड़ रही कालभैरव अष्टमी, धूम धाम से मनाया जाएगा पर्व, पढ़िये खबर

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार हर वर्ष मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव के क्रोध से कालभैरव की उत्पत्ति हुई थी। उस दिन से पूरे देश में कालभैरव अष्टमी का पर्व बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। आपको बता दें कि इस बार ये तिथि कल यानि 16 नवंबर यानि बुधवार के दिन पड़ रही है। बता दें कि कल के दिन कालभैरव अष्टमी का पर्व पूरे देश में मनाया जाएगा। क्या आप ये जानते है कि इसे कालभैरव जयंती भी कहते हैं। जहां इस दिन कुछ खास उपाय किए जाएं तो भगवान कालभैरव की कृपा हमेशा आप पर बनी रहती है और ग्रहों से संबंधित दोष भी दूर होते हैं। आइये जानते है कुछ उपाय।

इस मंत्र का करे उपाय

सबसे पहले 16 नवंबर यानि बुधवार के दिन भगवान कालभैरव की सर्वप्रथम पूजा करें। फिर इसके बाद चमेली के फूल विशेष रूप से चढ़ाएं और सरसों के तेल का चौमुखा दीपक लगाएं। इसके बाद रुद्राक्ष की माला से ऊं कालभैरवाय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। इस उपाय से राहु-केतु से संबंधित दोष दूर होते हैं।

इस चीज का लगाए भोग

दूसरे उपाय में कालभैरव अष्टमी पर भगवान कालभैरव को जलेबी या इमरती का भोग लागएं। बाद में इन्हें कुत्तों को खिला दें। कुत्तों को भैरव का वाहन माना जाता है। कुत्तों को मीठा खिलाने से शनि दोष में आराम मिलता है। गुड़-बेसन की रोटी भी कालभैरव को विशेष रूप से चढ़ाई जाती है। जो एक तरह से अच्छी मानी जाती है।

गाय को खिलाएं गुड़ और जौ

अगर आपकी कुंडली में राहु अशुभ स्थिति में हो तो पहले भगवान कालभैरव की पूजा करें और बाद में गाय को जौ और गुड़ खिलाएं। अगर संभव हो तो काले कपड़े में लपेट कर नदी में 11 बादाम प्रवाहित करें। इन उपायों से भी आपको शुभ फल मिल सकते हैं। जो यह भी अच्छा माना जाता है।

भगवान को ये चीज है बहुत पसंद

कोशिश करें कि कालभैरव अष्टमी पर किसी ऐसे भैरव मंदिर में जाएं, जहां आमतौर पर बहुत कम लोग जाते हैं। वहां जाकर मंदिर की साफ-सफाई करें। भैरव प्रतिमा पर सिंदूर और सरसों के तेल से चोला चढ़ाएं। इसके बाद शराब का भोग लगाएं। इस उपाय से आपकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है। क्या आप ये जानते है कि भगवान भैरव जी को शराब बहुत ज्यादा पसंद होती है।

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