जगन्नाथ मंदिर का रहस्य आज भी
जगन्नाथ मंदिर का रहस्य : भारत देश मंदिरों का देश है । हिंदू धर्म के अनुसार सभी मंदिरों में चार धाम की मंदिर प्रमुख हैं। उड़ीसा के पुरी में स्थित भगवान श्री जगन्नाथ का मंदिर इन्हीं चार धामों में से एक है। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ उनकी बहन सुभद्रा व बड़े भाई बलभद्र विराजमान है। इस मंदिर का निर्माण सन 1078 से 1148 के बीच हुआ जिसे कलिंग के राजा अनंत वर्मन चूर्ण गंगदेव ने करवाया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ के हाथ नहीं हैं बाकी उनके भाई व बहन के हाथ हैं ,ऐसा इसलिए है क्योंकि जब राजा शिल्पकार से मूर्तियां बनवा रहे थे तो शिल्पकार ने यह शर्त रखी थी कि वह मूर्तियों को बिना किसी के देखरेख में बनाएंगे और यदि कोई मूर्ति बनाते समय देख लेगा तो वह मूर्ति उसी अवस्था में छोड़ देंगे । मूर्तिकार लगभग मूर्तियों को बना चुका था किंतु राजा के मन में उत्सुकता बढ़ रही थी मूर्ति के दर्शन की। अपनी उत्सुकता काम ना कर पाने के कारण वह मूर्ति को देखने चला गया। मूर्तिकार ने जब यह देखा तो उसने मूर्ति वहीं पर बनाना छोड़ दिया इसी कारण से वर्तमान में भी भगवान जगन्नाथ के हाथ नहीं है।
जगन्नाथ मंदिर का रहस्य : जानिये इतिहास के पन्नो को
राजा गंगदेव के बाद बाद में सन 1197 में उड़िया के राजा आनंद भीमदेव ने इस मंदिर को एक नया रूप दिया। यही रूप आज वर्तमान में हमें देखने को मिलता है। मंदिर के निर्माण के बाद कई राजाओं की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई थी। अपनी भक्ति को प्रकट करने के लिए इन्हीं राजाओं ने कई कीमती आभूषण रत्न मंदिर को भेंट दिए। इन्हीं राज्यों में से एक राजा रणजीत सिंह भी थे जिन्होंने सिख गुरु हरविंदर सिंह को अनेकों आभूषण भेंट दिए किंतु उनसे भी ज्यादा कीमती आभूषण भगवान जगन्नाथ मंदिर को भेंट किया। उनकी वसीयत के अनुसार कोहिनूर हीरा भी इसी मंदिर को भेंट किया जाना था। तभी ब्रिटिश सरकार ने इस हीरे को छीन लिया प्राचीन काल से इस मंदिर को आभूषण व रत्नों से सजाया गया है और इन्हीं सब को एक खजाने में रखा गया है। यह खजाना भगवान जगन्नाथ के चरणों के नीचे रत्न भंडार में रखे हुए हैं।
जगन्नाथ मंदिर के इस रत्न भंडार में रखे खजाने की गिनती सन 1978 में की गई थी। खजाने की कीमत बताने के लिए देशभर से अनेकों जौहरी को बुलाया गया किंतु कई सारे ऐसे दुर्लभ रत्न थे जिनकी कीमत लगाने और उन्हें पहचानने में वे जौहरी असमर्थ रहे। 1978 के बाद इस खजाने के कमरे को 1985 में खोला गया लेकिन लेकिन खजाने की कोई गणना नहीं की गई थी। इस प्रकार पिछले 40 सालों से इस खजाने की गणना नहीं की गई है और 33 सालों से इस खजाने के कमरे का दरवाजा बंद है।
4 अप्रैल 2018 को हाईकोर्ट के आदेशानुसार मंदिर के खजाने की गणना की जानी थी जिसके लिए 16 लोगों का एक समूह बनाया गया। इन 16 लोगों में मंदिर के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर प्रदीप कुमार जेनर, पुरी के महाराज देवी सिंह जिले के कुछ अधिकारी आरके लॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के कुछ मेंबर्स और कुछ पुलिस इस टीम में शामिल थे। रत्न भंडार खोलते समय मंदिर परिसर के लोगों ने बताया कि खजाने की चाबी गुम हो गई है। तभी इस समूह ने उस कमरे की जांच की और वापस लौट गए। इसके बाद प्रदीप कुमार जैन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के द्वारा यह बताया कि सभी ने मंदिर की बाहर से जांच कर ली है और अंदर ना जा पाने की वजह को नहीं बताया। उसके बाद उसी शाम को मंदिर के लोगों के बीच एक बैठक बुलाई गई इस बैठक में खजाने की कमरे की चाबी के बारे में चर्चा की गई आपस में बात करके यह पता लगाया गया की चाबियां किन के पास हैं लेकिन चाबी का किसी को भी कोई पता नहीं?
जगन्नाथ मंदिर का रहस्य : श्रद्धालुओं व अन्य नागरिकों और मीडिया को बिल्कुल भी पता नहीं थी …..
यह बात मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं व अन्य नागरिकों और मीडिया को बिल्कुल भी पता नहीं थी लेकिन कुछ दिनों बाद यह बात लीक हो गई और मीडिया के द्वारा देशभर में चाबियां गुम हो जाने की खबर फैल गई। इस घटना के बाद मंदिर की सुरक्षा प्रणाली पर कई सवाल उठाए गए। आखिर चाबियां कहां गुम हुई? क्या जानबूझकर चाबी यों को हटाया गया? क्या कहीं चाबियां किसी के पास हैं? क्या कुछ खजाने गायब हो गए हैं?
श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम 1960 के अनुसार हर 6 महीने में मंदिर के खजाने को खोलना चाहिए। हर 3 साल बाद मंदिर की कमेटी चेंज होने पर रत्न भंडार की जांच की जानी चाहिए। लेकिन कोई भी ऐसा कार्य अभी तक नहीं हो पाया है प्रशासन मंदिर पर कोई दबाव नहीं डालती है और चाबी गुम हो जाने के कारण 35 सालों से यह दरवाजा आज तक बंद है।
कहा जाता है कि मंदिर से कुछ खजाना चोरी हो जाने के बाद 50 किलो का ताला बनवाया गया। कहा जाता है कि मंदिर से कुछ आभूषण भारत में गायब हो गए हैं किंतु मंदिर प्रशासन इस बात को मानने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है। अभी तक चाबी ओं का कोई पता नहीं चल पाया है लेकिन भारत देश की मंदिर होने के नाते हर भारतीय नागरिक अपने देश की संपत्ति के बारे में जानने का पूरा अधिकार है।
वो थी ही नहीं…….!

Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy

