श्रद्धांजलि – नहीं रहे हिन्दी के शीर्ष कवि केदारनाथ सिंह
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी के शीर्ष कवि केदारनाथ सिंह का देहांत कल रात एम्स में 9.10 बजे हुआ। वे 83 साल के थे। उनके देहांत के साथ ही भारतीय कविता का एक युग समाप्त हुआ। उत्तर प्रदेश के बलिया में जन्मे केदारनाथ सिंह ने अध्ययन बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से किया। बाद में वे जेएनयू में हिन्दी के प्राध्यापक बन गए।
साहित्य साधना के साथ साथ वे जेएनयू में हिन्दी के प्राध्यापक रहे। उनकी स्मृति में उनके प्रसंशकों ने उनके साथ साथ उनकी कविताओं को भी याद किया।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत ही ट्वीट कर अपनी श्रद्धांजलि दी:
सुप्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार केदारनाथ सिंह जी के निधन के समाचार से मुझे गहरी वेदना की अनुभूति हुई है। सरल भाषा में जीवन की जटिलताओं की अभिव्यक्ति करने की उनकी अनूठी शैली थी। उनके निधन से हिंदी जगत का एक सशक्त हस्ताक्षर मिट गया है. ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) March 19, 2018
प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रधानमंत्री का शोकसंदेश भी जारी हुआ:
हिन्दी के महान कवि-साहित्यकार केदारनाथ सिंह जी के निधन से गहरा दुख हुआ है। उन्होंने लोकजीवन की संवेदनाओं को अपनी कविताओं में जगह दी। साहित्य जगत और सामान्य जन दोनों को हमेशा उनसे प्रेरणा मिलती रहेगी। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे और परिवार को इस दुखद घड़ी में संबल प्रदान करे: PM
— PMO India (@PMOIndia) March 20, 2018
उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी अपनी संवेदना व्यक्त की:
प्रसिद्ध साहित्यकार श्री केदारनाथ सिंह जी के निधन पर गहरा दुःख हुआ।। श्री केदारनाथ सिंह ने समकालीन कविता को नई गति और दिशा देते हुए अपनी कालजयी रचनाओं से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 20, 2018
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी कवि श्री केदारनाथ सिंह को सादर श्रद्धांजलि। हिन्दी जगत ने माँ सरस्वती का महान साधक खो दिया। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।
— ShivrajSingh Chouhan (@ChouhanShivraj) March 19, 2018
जेएनयू में उनके छात्र रहे उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी राहुल श्रीवास्तव ने उनकी याद में उनकी कविता ट्वीट किया:
ज़रूरी है
हम जहाँ हों,
वहाँ से दिखता रहे
वह झिलमिलाता क्षितिज
जो केवल हमारा है #केदारनाथ_सिंह ।
श्रद्धांजली ? pic.twitter.com/1NjYY3HCJh— RAHUL SRIVASTAV (@upcoprahul) March 19, 2018
लोगों ने उनकी एक प्रसिद्ध कविता को भी बहुत शेयर किया:
“मैं जा रही हूँ – उसने कहा
जाओ – मैंने उत्तर दिया
यह जानते हुए कि जाना
हिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है”
“मैं जा रही हूँ – उसने कहा
जाओ – मैंने उत्तर दिया
यह जानते हुए कि जाना
हिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है”~ केदारनाथ सिंह
हमारे युग के महाकवि को अंतिम प्रणाम एवं भावभीनी विदाई।
— Amit Srivastava (@AmiSri) March 20, 2018
“आधा शव में
आधा नींद में है
आधा शंख में
अगर ध्यान से देखो
तो यह आधा है
और आधा नहीं भी है”: (बनारस) केदारनाथ सिंहअभी पता चला ,केदारनाथ सिंह अब शरीर में नहीं रहे !
20 नवम्बर 1934 – 19 मार्च 2018
जन्म स्थान: ग्राम चकिया, जिला बलिया, उत्तर प्रदेश!Shambho ?? pic.twitter.com/C7g1sFGnXS
— RJ Raunac (@rjraunac) March 19, 2018
‘हर योजना पर, हर विकास पर दो मिनट का मौन, इस महान शताब्दी पर दो मिनट का मौन.’ केदारनाथ सिंह की कविता उन्हीं की ज़बानी… pic.twitter.com/r4haT9GOQe
— BBC News Hindi (@BBCHindi) March 20, 2018
“उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए मैंने सोचा,
दुनिया को हाथ की तरह गर्म और सुंदर होना चाहिए”.
कविता के अक्षर खो गए, एक युग का अवसान हुआ, नहीं रहे केदारनाथ सिंह जी!
भावभीनी श्रद्धांजलि?#केदारनाथसिंह— Malini Awasthi (@maliniawasthi) March 19, 2018
जेएनयू में केदारनाथ सिंह के छात्र उन्हे कुछ ऐसे याद करते हैं, “इस बात का भी गर्व होता है कि अपने समय के कविता के सर्वश्रेष्ठ अध्यापक से पढ़ने का अवसर मिला। केदारजी की वह आवाज कानों में अब भी गूंजती है…”
हिन्दी के महास्तम्भ को नमन।

