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क्या आप रावण का पुतला दहन करने का अधिकार व श्री राम जैसे महान चरित्र का समावेश अपनी अंतर आत्मा मे रखते है

 आज विजय दशमी दशहरे का दिन है मतलब बुराई पर अच्छाई के विजय का दिवस जिस दिन परम्परा अनुसार हम रावण को बुराई का प्रतीक मान कर उसका पुतला दहन करते है

लेकिन इस पुतला दहन पर आज प्रश्न चिन्ह लगाना भी लाजमी है क्योकि रावण रूपी बुराई का पुतला जलाने से पहले स्वयं के चरित्र और अच्छाई आंकलन करना भी आज जरूरी है ।

ईमानदारी से अगर आप स्वयं का आंकलन करे तो परिणाम स्वरूप कुछ बिंदु आपके सामने आते है ।

क्या आप रावण का पुतला दहन करने का अधिकार व श्री राम जैसे महान चरित्र का समावेश अपनी अंतर आत्मा मे रखते है अगर हा …तो आप रावण का पुतला दहन करने का अधिकार भी रखते है अगर नही तो आप अपने आपको रावण के चरित्र के इर्द गिर्द ही देख सकते है ।

मुझे नही लगता कि आज के समय मे राम के चरित्र के आगे का ‘च’ भी आपमे से किसी व्यक्ति विशेष के पास होगा ।

अगर रावण रूपी बुराई का अंत करने वाले श्री राम के चरित्र का ‘च’ भी हमारे पास नही है तो हम और आप होते कौन है रावण का पुतला जलाने वाले इसलिए अच्छा होगा कि हम और आप रावण का पुतला दहन करने से पहले स्वयं के अंदर विराजमान बुराइयो के पुतला दहन करने की और बढ़े तथा एक ..एक कर अपने अंदर की बुराइयो को बाहर लाकर उनका पुतला दहन करने की और अग्रसर हो ऐसा करने के बाद ही हम स्वयं को श्री राम के चरित्र के आस पास चरणों की धूल के रूप मे देख सकते है व विजय दिवस मनाने के वास्तविक अधिकारी के रूप स्थापित कर सकते ।

अपने इसी लेख व विचारो के साथ आप सभी मित्रो को विजय दशमी के इस शुभ अवसर पर हार्दिक शुभ कामनाये

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