क्या महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन पर लग गया है प्रश्न चिन्ह?
21 अक्टूबर को महाराष्ट्र और हरियाणा में एक साथ विधानसभा चुनाव संपन्न हुए। मगर इन दोनों जगहों पर भारतीय जनता पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। जहां हरियाणा में एक तरफ भारतीय जनता पार्टी की सीटें पहले की अपेक्षा कम हुई हैं। वहीं महाराष्ट्र में भी भारतीय जनता पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में एक बार यह प्रश्न चिन्ह लग गया है क्या भाजपा और शिवसेना फिर से मुख्यमंत्रियों पर सहमत होकर एक साथ आ पाएंगे?
हाल ही में कार्टूनिस्ट रवि एक कार्टून बनाया था जिसमें शिवसेना के चुनाव चिन्ह बाघ के गले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की चुनाव चिन्ह घड़ी है और वह भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह कमल के फूल को सूंघ रहा है। ऐसे में संजय रावत द्वारा जो कि शिवसेना के राज सभा सांसद हैं ट्वीट किए जाने पर इस मामले ने तूल पकड़ लिया। कयास लगाए जा रहे हैं महाराष्ट्र में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
भाजपा और शिवसेना नहीं है मुख्यमंत्री पद को लेकर सहमत
पिछली बार भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा चुनाव में 122 सीटें मिली थीं। तब मुख्यमंत्री के तौर पर भाजपा ने देवेंद्र फडणवीस को नियुक्त किया था। पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना को भी 63 सीटें प्राप्त हुई थीं। इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटें घटकर 122 से 105 हो गई हैं। वहीं शिवसेना भी 63 से 56 पर आ चुकी है। मगर दोनों के बीच मुख्यमंत्री को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है।

शिवसेना पहले ही आदित्य ठाकरे के रूप में मुख्यमंत्री के पसंद के रूप में अपना विचार जाहिर कर चुकी है। मगर भारतीय जनता पार्टी इस पर सहमत नहीं है।
शिवसेना अन्य दलों के साथ भी मिलकर बना सकती है सरकार
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 44 और शरद पवार की एनसीपी को 54 सीटें प्राप्त हुई हैं। ऐसे में यदि भाजपा और फिर सेना की बात नहीं बनती है तो शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर भी सरकार बना सकती हैं। कांग्रेश पहले से ही इस मौके का फायदा उठाने के लिए तैयार है।
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