फ्रांसीसी अखबार के दावे से एक बार फिर गरमाया राफेल विमान का मुद्दा
राफेल सौदा देश का ऐसा विषय बन गया है जो कि शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। राफेल विमान के सौदे को लेकर पिछले कई महीनों से सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी का सिलसिला जारी है। विपक्ष मोदी सरकार पर आरोप लगाता रहा है कि सरकार ने सौदे को लेकर अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस को फायदा पहुंचाया है। जबकि भाजपा सरकार इसे सिरे से नकारती रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा राफेल पर सुनवाई करने की बात को मान ली है। फ्रांस के अखबार ले मुंड की खबर के मुताबिक फ्रांस में स्थित कंपनी रिलायंस फ्लैग को 2015 में राफेल विमान सौदे के बाद लगभग 14 करोड यूरो यानी कि 1100 करोड़ रुपए कर में छूट मिली है।
अखबार ने खुलासा किया है कि अप्रैल 2015 तक अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस फ्लैक्स को 15 करोड़ यूरो चुकाने थे। मगर अक्टूबर 2015 तक रिलायंस ने 73 लाखों यूरो में मामला निपटा दिया। इससे रिलायंस को फ्रांस में बहुत राहत मिली।
फ्रांस के अखबार के इस दावे के बाद विपक्ष को एक बार फिर से मोदी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हमने तो पहले ही कहा था कि चौकीदार चोर है। रिलायंस को फ्रांस में मिली इस कर छूट के पीछे मोदी जी की मेहरबानी है। मोदी जी की वजह से ही रिलायंस का कर्जा माफ किया गया।
वहीं रक्षा मंत्रालय ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि रिलायंस की कर्ज माफी और राफेल सौदे के बीच दूर दूर तक कोई भी संबंध नहीं है। रिलायंस कम्युनिकेशन के प्रवक्ता ने भी ट्वीट कर कहा कि यह कर माफी गैरकानूनी थी जिसकी वजह से आपसी सहमत से कर सेटलमेंट का फैसला लिया।
फ्रांस ने भी शनिवार को आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा की रिलायंस और फ्रांस के बीच कर सेटेलमेंट की वैश्विक सहमति बनी थी। इसमें किसी भी प्रकार की राजनीतिक दखलंदाजी नहीं की गई।
राफेल सौदे पर फिर से शुरू हुए इस विवाद के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने बयान देते हुए यह कहा कि पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इसीलिए पर छोड़ा था क्योंकि वह राफेल सौदे से नाराज थे।

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