आज से हुई शारदीय नवरात्र की शुरूआत, पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज पूरे देश में हो चुकी है। जहां लोग आज से बड़े ही नियम के साथ माता की पूजा करते है। जैसा कि हम सभी जानते है कि पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। इस बार नवरात्रि में कोई तिथि क्षय भी नहीं है। सभी 9 तिथियां क्रमवार तरीके से पड़ेंगी।बता दें कि पहले दिन कलश स्थापना के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं। सर्वश्रेष्ठ समय सुबह 11.48 बजे से दोपहर 12.36 तक का है।
होगी मां दुर्गा की पूजा
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज से हो गई है। वहीं, अगले नौ दिन शक्ति की देवी माता दुर्गा की नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। वहीं, पहले दिन नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की परंपरा है। इसके बाद ही पूजा-पाठ की शुरुआत की जाती है। जो 9 दिनों तक जारी रहती है।
यह है मुहूर्त
26 सितंबर से अश्विन मास के प्रतिपदा तिथि की शुरुआत हो रही है। प्रतिपदा सुबह 03.23 बजे से शुरू हो चुका है और इसका समापन 27 की सुबह 03.08 मिनट पर होगा। आज अमृत काल 06.11 से 07.41 तक है। शुभ समय- 09.11 से 10.42 तक (शुभ चौघड़िया) है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.48 बजे से दोपहर 12.36 तक ( स्थिर लग्न, वृश्चिक, सर्वश्रेष्ठ समय) है। ये भी समय कलश स्थापन के लिए शुभ हैं।
माता इस बार यह सवारी पर होकर आएंगी
जानकारी के अनुसार बता दें कि नवरात्र पर इस बार माता दुर्गा हाथी की सवारी पर पृथ्वी लोक में आ रही हैं। वहीं, विजयदशमी को बुधवार के दिन नौका की सवारी से मां वापस जाएंगी। इस बार 3 अक्तूबर को दुर्गा अष्टमी, 4 को महानवमी तिथि होगी। नवरात्रि की सभी तिथियां 26 सितंबर से 4 अक्तूबर तक एक सीधे क्रम में रहेंगी। कोई तिथि क्षय इस बार नहीं है।
यह है मान्यता
दरअसल, नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है। पर्वतराज हिमालय के घर मां भगवती अवतरित हुईं। इसीलिए उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। ऐसी मान्यता है कि अगर जातक शैलपुत्री का ही पूजन करते हैं तो उन्हें नौ देवियों की कृपा प्राप्त होती है। इसलिए कई ऐसे लोग जो 9 दिन का उपवास नहीं कर पाते या पूजन नहीं कर पाते वे पहले दिन शैलपुत्री की पूजा जरूरत करते हैं।

