भाग-दौड़ के बीच सुकून के दो पल देती है ‘फोटोग्राफ’
इस भागती-दौड़ती ज़िंदगी में अगर आपको आपकी कई साल पहले खिंचवाई गयी कोई तस्वीर हाथ लग जाए तो अचानक से आपकी आँखों में वही पुरानी वाली चमक लौट आती है। इसी इमोशन पर है बनी फिल्म है ‘फोटोग्राफ’। शहर की भागती-दौड़ती और ऊपर से शहर भी मुंबई हो तो हर आदमी कुछ समय के लिए सुकून ढूंढ़ता है। ज़िंदगी की इसी खामोशी को फिल्म में दिखाया गया है। काफी लम्बे समय के बाद नवाज़ुद्दीन अपनी पुरानी वाली छवि में नज़र आ रहे है। उनके जैसे कलाकार अपनी हर फिल्म में…
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