भाग-दौड़ के बीच सुकून के दो पल देती है ‘फोटोग्राफ’
इस भागती-दौड़ती ज़िंदगी में अगर आपको आपकी कई साल पहले खिंचवाई गयी कोई तस्वीर हाथ लग जाए तो अचानक से आपकी आँखों में वही पुरानी वाली चमक लौट आती है। इसी इमोशन पर है बनी फिल्म है ‘फोटोग्राफ’। शहर की भागती-दौड़ती और ऊपर से शहर भी मुंबई हो तो हर आदमी कुछ समय के लिए सुकून ढूंढ़ता है। ज़िंदगी की इसी खामोशी को फिल्म में दिखाया गया है।
काफी लम्बे समय के बाद नवाज़ुद्दीन अपनी पुरानी वाली छवि में नज़र आ रहे है।

उनके जैसे कलाकार अपनी हर फिल्म में कोई कमी नहीं छोड़ते है।हर किरदार में ढलने की उनकी अदा उनको एक गंभीर कलाकार बनाती है। सान्या मल्होत्रा वाकई तारीफ़ के लायक है। सही कहानी, सही स्क्रिप्ट को चुनने की उनकी काबिलियत ने उन्हें बेहद कम समय में बॉलीवुड की नामी-गिरामी फिल्मो का हिस्सा बना दिया है।वो हर एक फिल्म के साथ खुद को इम्प्रूव करती जा रही है।और आने वाले समय में कोई दो राय नहीं है की वो बड़े बैनर का भी हिस्सा रहेंगी।
भारत में रिलीज़ से पहले फिल्म ‘फोटोग्राफ’ Sundance फिल्म फेस्टिवल और बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में अपना जलवा बिखेर चुकी है। भारत में रिलीज़ के साथ-साथ ये फिल्म यू।के। यू।एस।ऐ। स्पेन, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया में भी रिलीज़ हो चुकी है। दोस्तों,हम उम्मीद करंगे की लंच बॉक्स की तरह फिल्म ‘फोटोग्राफ’ भी दर्शको का दिल जीतने में कामयाब रहेगी।
रितेश बत्रा की फिल्मे तनाव और तेज़ी से भागती ज़िंदगी में कुछ पल ठहराव के लाती है और अपनी इस कोशिश मै वो कामयाब भी हुए है। लंच बॉक्स के काफी समय बाद लायी गयी उनकी ये फिल्म थिएटर से निकलते वक़्त कुछ देर के लिए हमे खामोश कर देती है

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