चुनाव के मौसम में फिर से बोतल के बाहर निकला राफेल का जिन्न
चुनावी मुद्दे तो पार्टियां अपना रखती ही हैं किन्तु इस बार लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के पूर्व ही उच्चतम न्यायालय द्वारा लीक दस्तावेजों को आधार को अनुमति देने और केंद्र की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज करने के पश्चात राफेल सौदे का सियासी मुद्दा एक बार फिर गरमाया है। इस पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नरेन्द्र मोदी को खुली बहस की चुनौती देते हुए दावा किया कि उच्चतम न्यायालय ने यह मान लिया है कि राफेल सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है।
बात यहीं खत्म नहीं होती, राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से प्रश्न किया कि यह बात उच्चतम न्यायालय ने कब कही? उन्होने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि आपको उच्चतम न्यायालय की तरफ से बोलने का अधिकार किसने दिया जबकि आप स्वयं बेल पर बाहर हैं। निर्मला जी ने राहुल गांधी के इस वक्तव्य को साफ तौर पर झुठलाते हुए कहा कि अभी तक कोर्ट ने ऐसा कोई भी आदेश या सूचना जारी नहीं किया है।
इस घटना के संदर्भ में एक बीजेपी नेता ने कहा कि यह कोर्ट की अवमानना है। कोर्ट के आदेश या सूचना में फेर बदल कर या गलत आदेश को प्रसारित करना उच्चतम न्यायालय की अवमानना कहलाती है इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष को कारागार हो सकता है। उन्होंने कहा कि कोर्ट को सारे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराया जा चुका है और कोर्ट के अनुसार सितंबर 2019 तक राफेल भारत में आ जाएगा।
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के द्वारा हो तभी न्याय हो सकता है।
कोर्ट ने विशेषाधिकार होने की केंद्र की प्रारंभिक अपील को खारिज करते हुए कहा कि पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान विमानों की कीमत के मुद्दे और निर्माण करने वाली कंपनी दसॉ के भारतीय ऑफसेट पार्टनर के चयन के मुद्दे की जांच भी करेगी।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



