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सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर सूचना के अधिकार को खत्म करने की साजिश का लगाया आरोप

लोकसभा चुनाव में मिली भारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी अब अपने लिए जमीन तलाशने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रही है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हुए भीषण हत्याकांड के दौरान प्रियंका गांधी काफी सक्रिय नजर आईं। उन्होंने तुरंत ही इस कांड पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोनभद्र के पीड़ितों से मिलने के लिए पहुंची। जहां पर पुलिस ने पहले तो उन्हें रोककर नजरबंद कर लिया। जिसके बाद पूरी कांग्रेस तुरंत सक्रिय हो गई। इससे यह पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी दोबारा से अपने आप को मजबूत करने का कोई भी रास्ता छोड़ना नहीं चाहती। इसी को देखते हुए हाल ही में राज्यसभा में संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की सरकार पर यह आरोप लगाया है कि मोदी सरकार सूचना के अधिकार को खत्म करने की साजिश कर रही है। किसी के लिए वह संशोधन लेकर आई है।

2005 में बना था कानून

दरअसल सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में मनमोहन सिंह सरकार के समय संसद में पेश किया गया था। उस समय इस बिल को लेकर संसद में काफी व्यापक तौर पर विचार-विमर्श किया गया था। जिसमें सभी दलों के बड़े नेता शामिल थे और सभी दलों की सहमति के बाद ही इसे संसद में पारित करवाया गया था। सोनिया गांधी का आरोप है कि जब उस समय सभी दलों के नेताओं की सर्वसम्मति से इसे पास किया गया था तो फिर अब इसके संशोधन की साजिश क्यों रची जा रही है।

सोनिया गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में 700000 से ज्यादा लोगों ने आईटीआई का प्रयोग करके शासन की पारदर्शिता और उसकी जवाबदेही का उपयोग किया है। ऐसे में मोदी सरकार इस कानून को संशोधित करके देश के हर नागरिक को कमजोर करने के लिए प्रयासरत है। सोनिया गांधी के बयान से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि राज्यसभा में सूचना के अधिकार संशोधन अधिनियम 2019 में कांग्रेस पार्टी बाधा बनने का प्रयास करेगी।

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सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर सूचना के अधिकार को खत्म करने की साजिश का लगाया आरोप
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सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर सूचना के अधिकार को खत्म करने की साजिश का लगाया आरोप
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हाल ही में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रह चुके सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर यह आरोप लगाया है कि वह सूचना के अधिकार अधिनियम को खत्म करने का प्रयास कर रही है।
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