जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को पकड़ने के लिए पंडित बना मुसलमान
आपने अक्सर हमारे देश में कई ऐसे जांबाज पुलिस वालों के बारे में सुना होगा जो कि दुश्मनों से लोहा लेने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। हमारे खुफिया विभाग के एजेंट दो आतंकवादियों या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपना पूरा का पूरा हुलिया तक बदल देते हैं और वह उसी बदले हुए रूप में कई सालों तक उनकी तलाश में घूमते रहते हैं। हाल ही में एक ऐसा वाकया सामने आया है जब श्रीनगर के एक पंडित पुलिसकर्मी ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को पकड़ने के लिए खुद को पंडित से मुसलमान बना लिया। उसने स्थानीय भाषा सीखी। मुसलमानी तरीके सीखे और फिर जाकर आतंकवादियों को पकड़वाने में पूरी तरह से कामयाबी हासिल की।
3 साल पहले फरार हो गए थे आतंकवादी
दरअसल दिल्ली के स्पेशल सेल ने 2007 में एक बड़ी घटना को अंजाम देने आए पाकिस्तानी आतंकवादी शाहिद गफूर और कश्मीरी आतंकवादी अब्दुल मजीद ,बशीर अहमद और फयाज अहमद को गिरफ्तार किया था। 2013 में शाहिद कपूर को दोषी करार दिया गया मगर बाकी को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस की रिक्वेस्ट के बाद सभी आतंकवादियों को दोषी करार दे दिया गया। मगर इनमें से तीन आतंकवादी पुलिस को चकमा देते हुए भाग खड़े हुए। दिल्ली के पुलिस विभाग ने इन आतंकवादियों को पकड़ने के लिए श्रीनगर के एक पंडित पुलिसकर्मी को खुफिया जासूस बनाकर कश्मीर के इलाके में सक्रिय रहने के लिए भेजा।
श्रीनगर पुलिस में काम करने वाले और जम्मू कश्मीर में रहने वाले लोगों की तरह दिखने वाले पुलिसकर्मी सुरेश वत्स को चुना गया। उन्होंने कई सालों तक खुद को मुसलमान की तरह बना कर रखा। मुसलमान के तौर तरीके सीखे और स्थानीय लोगों से बातचीत करते रहे। आखिरकार कई सालों बाद जासूस सुरेश वत्स को कामयाबी मिल ही गई और मार्च 2019 से लेकर जुलाई 2019 तक के बीच सभी फरार आतंकवादियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



