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अध्यक्ष के जाने से दुखी सलमान खुर्शीद की निकली आह!

दुखी सलमान खुर्शीद की निकली आह! : “राहुल जी हमें छोड़ के चले गए” यह महज एक दुख और हताशा से भरा बयान नहीं अपितु गाँधी परिवार के चमचे और कभी लुटियन दिल्ली में आलीशान पार्टीज की राजीनीति करने वाले दिग्गज कांग्रेस नेता और गाँधी परिवार के चमचो की गैंग के अहम सदस्य सलमान खुर्शीद के अलफ़ाज़ है, जो आजकल स्माइल करना तो भूल चुके है।

अब खुर्शीद साहब एक दुखी आत्मा बन चुके है जिन्हें कांग्रेस में केवल अँधेरा दिखाई दे रहा है। पहले 2014 में करारी हार तो पीएम मनोमहन सिंह के सिर ठीखरा फोड़ने का बहाना तो था लेकिन 2019 में तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गाँधी की फुल लीडरशिप में पार्टी के आज तक सबसे ख़राब प्रदर्शन ने पार्टी को पूरी तरह से गर्द में डाल दिया है जिससे सभी घाटी के कोंग्रेसियों में बेचैनी, हताशा, निराशा और दुखमयता पूरे मन पर घर चुकी है। इटालियन माता जी सोनिया गाँधी भी कुछ ख़ास भूमिका निभा नहीं पा रही है और प्रियंका गाँधी तो बस ट्विटरबाज़ी वाली नेत्री बनकर रह चुकी है।

 

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दुखी सलमान खुर्शीद ने शुरुआत की आह से फिर वफादारी की लार टपका दी

 

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राहुल बाबा कहाँ तुम चले गए ?

लोकसभा चुनाव 2019 के बाद इस साल के पहले इम्तिहान यानी महाराष्ट्र और हरियाणा के राज्यों में सत्ता वापसी की उम्मीद में जुटी कांग्रेस को खुद के ही दिग्गजों द्वारा विद्रोही स्वरुप में आइना दिखाया जा रहा। हरियाणा से अशोक तंवर पहले ही पार्टी छोड़ चुके है और महाराष्ट्र से संजय निरुपम भी विरोधी स्वर पकड़ चुके है।

अब इन दोनों नेताओं के बातों का भी कुछ असर सलमान खुर्शीद साहब पर हो रहा होगा जो पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद से ही अधिक चिंता और दुख से ग्रस्त है। आज मीडिया से मुखातिब होते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की मौजूदा खस्ता हालत की समीक्षा जानी चाहिए।

 

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पार्टी की बुरी हालत को स्वीकारते हुए खुर्शीद ने कहा- “हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारे नेता राहुल जी हमको छोड़ के चले गए हैं। उन्होंने आवेश में इस्तीफा दे दिया, जबकि मैं बिलकुल नहीं चाहता था कि वह इस्तीफा दें और हमें छोड़ के चले जाएं। अब हमको उनकी खमी खल रही है।”

जब लगा कि हद से ज़्यादा भावुक हो चले है तो मियां खुर्शीद साहब ने कहा कि वह राहुल गाँधी के फैसले का सम्मान करते है और उन सबके लिए (गाँधी परिवार के चमचो के लिए) वही सबसे बड़े नेता रहेंगे।

 

लास्ट में उन्होंने ऐसा इसलिए कहा ताकि उनके मुँह से निकली कड़वी सच्चाई से आलाकमान नाराज़ न हो जाए और अन्य विद्रोहियों की लिस्ट में उनका नाम न जोड़ दिया जाए। दुखी आत्मा सलमान खुर्शीद का दर्द समझा जा सकता है ! अब करने को कुछ खास है नहीं। इतनी मंत्रीगिरी की जा चुकी है कि अब तो वकालत करने का मन भी नहीं करता। कोपभवन में रो-रो कर काम न बना तो वफादारी और चिंतित नेता का स्वांग रचने के लिए मीडिया के सामने आ गए शायद एएआईसीसी में कुछ जिम्मेदारी दे दी जाये। अब देखना होगा कि पार्टी उनकी बात को भाव देती है या फिर उल्टा कार्यवाही करती है। बेचारे खुर्शीद साहब अब तो दुखी होकर पार्टी को सन्देश दे गए लेकिन यह परिवार की गुलाम पार्टी ख़ाक इस पर विचार या अमल करेगी।

 

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